Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन

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Saturday, April 8, 2017

टीनएज ट्रकवाली (कहानी) #ज़हन


थाने में बैठा कमलू सिपाहियों, पत्रकारों और कुछ लोगो की भीड़ लगने का इंतज़ार कर रहा था ताकि अपनी कहानी ज़्यादा से ज़्यादा लोगो को सुना सके। पुलिस के बारे में उसने काफी उल्टा-सुल्टा सुन रखा था तो मन के दिलासे के लिए कुछ देर रुकना बेहतर समझा। 

"हज़ारो किलोमीटर लम्बा सफर करते हैं हम ट्रक वाले साहब! एक बार में पूरा देश नाप देते हैं। जगह-जगह रुकता हूँ, सब जानते हैं मुझे। आपके थाने में 4 ढाबे पड़ते हैं पर रात में केवल एक खुला मिलता है तो अक्सर यहाँ रुकना होता है। एक बार उसके अगले पेट्रोल पंप के बाहर बैठी एक लड़की देखी, यहाँ की नहीं लग रही थी और पता नहीं रात को वहाँ क्या कर रही थी...या शायद मुझे पता था पर मैं मानना नहीं चाहता था। अगली बार जब आया तो वह लड़की मरी आँखों वाली एक औरत  बन गई थी। सोचा 'काश उस दिन रुक जाता! पर रुककर, कर भी क्या लेता...रुक के देख तो ले पगले...शायद कुछ हो जाए।' लोगो और पुलिस की नज़रों से बचने के लिए पेट्रोल पंप वाला धंधे पर एक-दो लड़कियाँ ही रखता था, जब किसी की नज़र पड़ती भी थी तो उसपर पैसे डाल दिया करता। पहले आप लोगो को बताया तो मुझे बाहर से ही भगा दिया फिर अपने जमा रुपयों से ये लड़की खरीदी और हेल्पर हटाकर इसे रख लिया। कुछ हफ्तों बाद यहाँ से जाते हुए एक लड़की दिखी, आदत ऐसे थोड़े ही जाती है। मैंने पंप के मालिक को समझाने की बहुत कोशिश की पर वो नहीं माना, उल्टा मुझे बेची लड़की ज़बरदस्ती वापस लेने की बात करने लगा। किसी तरह वो लड़की भी खरीदी, अब मेरी 2 हेल्पर हो गयीं। फिर महीनेभर बाद के चक्कर में एक और...मैंने कह-कहा के अपने एक दोस्त की शादी उस से करवा दी। जब अगले चक्कर में नई लड़की खड़ी दिखी तो रहा नहीं गया। मोड़ दिया ट्रक पेट्रोल पम्प की ओर और कुचल दिए उसके मालिक और 3 नौकर। फिर एक्सिलरेटर दबा के कूद गया बाहर, ट्रक लड़ा पेट्रोल टंकी में और ब्लास्ट हो गया।"

एक पत्रकार ने पूछा, "यह सही रास्ता नहीं है....तुम्हारे पागलपन में 2 निर्दोष लोग मारे गए और कुछ घायल हुए उनका क्या?"

कमलू मुस्कुराकर बोला - "उनका कुछ नहीं....जैसे रोज़ सबके सामने बिकती इन लड़कियों का कुछ नहीं। सही रास्ते पर चलकर देख लिया बाबू! कहीं नहीं जाता, बस गोल-गोल घुमाते हो तुम लोग और आदमी थक-हार कर लड़ाई छोड़ देता है।"

वह पत्रकार साथी पत्रकारों के सामने अपनी इतनी आसान चेक-मेट कैसे मान लेता, "अब इन लड़कियों का क्या होगा? इतनी ही फ़िक्र थी इनकी तो यह काम करने से पहले इनका तो सोचा होता।"

कमलू - "बाकी 15-16 की हैं पर इनमे एक 19 साल की है, उसको थोड़ा सिखाया है और लाइसेंस दिलवा दिए हैं। अभी छोटे रुट पर ट्रक चलाएगी बाकियों को बैठाकर।"

पत्रकार - "लाइसेंस दिलवा दिए हैं मतलब ट्रक के अलावा और क्या चलाएगी?"

कमलू - "ज़रुरत पड़ने पर बंदूक भी चलाएगी...."

समाप्त!

#मोहित_शर्मा_ज़हन #mohit_trendster
Read Kaash mey Dabi Aah (Story)

Wednesday, February 8, 2017

रिया के मम्मी-पापा (डार्क कहानी)


*कमज़ोर दिल के लोग यह कहानी न पढ़ें।*

रिया की मम्मी - "मैं और मेरे पति सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं...कम से कम बाहर से कोई मिले या देखता होगा, वह तो यही कहेगा। कुछ महीने पहले हमारी एकलौती बेटी रिया ने आत्महत्या कर ली। उसका वज़न सामान्य से अधिक था, बस इतनी सी बात थी। भला यह भी कोई बात हुई? काश एक बार मुझसे या अपने पिता से अपना जी बाँट लेती। समाज की यही तो रीत है - हर चीज़ में सामान्य होने की एक सीमा/रेंज है। जैसे शादी इतने साल से इतने साल तक हुई तो ठीक इसके बाहर तो बर्बाद, इतना शरीर सामान्य, इसके ऊपर या नीचे बर्बाद, इतनी पढाई ठीक....इसके नीचे बर्बाद! अब हम बड़े तो एकबार सुनकर फिर अपने-अपने काम में लग जाते हैं पर बेचारे बच्चे कहाँ तक समझे और कितना सहें? उनके जीवन में ध्यान बँटाने वाली ज़िम्मेदारियां नहीं होती ना!

बच्ची की कमी न महसूस हो इसलिए रिया के पापा उसके साथ की तीन और बच्चियाँ उठा लाये। आखिर बाप का दिल है, मैं भी क्या समझाती इन्हें? ये 3 वही लड़कियां हैं जो रिया के मोटापे का मज़ाक बनाती रहती थी। इतना कोमल मन था मेरी बच्ची का, किसी का दर्द नहीं देख पाती थी पर जाने कितने महीने अपना दर्द अनदेखा कर छुपाती रही। उसे लगा होगा कि कभी न कभी ये लड़कियां उसके व्यक्तित्व को सराहेंगी, पेंटिंग, डांस, गायन जैसे उसके हुनर शायद उसको सबकी खासकर इन तीनो की "सामान्य रेंज" में ले आएं। ओह! मैं ज़रा खाना देख आऊं, अंदर तीनो बच्ची लोग भूखी होंगी बाकी आगे रिया के पापा बताएंगे।"

रिया के पापा - "आप कहोगे क्या दरिंदे हो गए हैं हम पति-पत्नी? इन लड़कियों को क्यों प्रताड़ित कर रहे हैं? अरे किसी चीज़ की कमी नहीं है इन्हें यहाँ। अच्छे कपडे, किताबें, टी.वी. और खाना! मोटापा कम करने के लिए लाइपोसक्शन नाम का एक ऑपरेशन होता है। इस ऑपरेशन में व्यक्ति के शरीर से अतिरिक्त वसा (फैट) निकाला जाता है। रिया 18 साल की होती और एक बार कहती तो तुरंत उसका यह ऑपरेशन करवा देता पर अभी उसमे 2 साल थे। फिर भी मैंने शहर के 2 ऐसे अस्पतालों के चपरासियों से सेटिंग कर ली है। उन दोनों से मुझे हर हफ्ते शहर में कुछ लोगो के लाइपोसक्शन से निकला 25-30 किलो फैट मिल जाता है। उसी को कच्चा या उसके पकवान बना कर इन्हें बड़े प्यार से खिलाते हैं हम दोनों। बताओ कोई अपने बच्चो के लिए भी करेगा इतना? लो बन गया खाना। इन्हें रिया की चौथी फ्रेंड के बारे में नहीं बताया?"

रिया की मम्मी - "अरे हाँ! तीन नहीं चार थी ये ग्रुप में। तभी हफ्ते का इतना फैट कम पड़ जाता था। वो तो अच्छा हुआ इनमे से एक स्टोर रूम से भागने की कोशिश में रिया के पापा के हाथ आ गई। फिर मैंने और इन्होंने उस लड़की को फैट के कनस्तर में डाला....फिल्मो, सीरियलों में जैसे दलदल में डूबते दिखाते हैं लोगो को वैसे धीरे-धीरे डूबी वो लड़की। ठीक ही हुआ! वो लड़की ही सबसे ज़्यादा चींचां और उल्टियाँ करती थी बाकी तीन तो शांत हैं बेचारी। ये सब छोडो आप अपनी सुनाओ? इस बार खाना खाये बिना नहीं जाने देंगे आपको..."

समाप्त!

- मोहित शर्मा ज़हन

Read: अमीर की हाय (कहानी)
Listen: Dimaag ki Faltu Random Lyrics Storage (Mohit Trendster)

Sunday, October 30, 2011

Indi Horror my 3rd eBook




Ebook Description

Horror stories with Indian backdrops. Characters, scenes, thrill-horror creating elements have a distinct Indian touch. Apart from the horror element this book helps in the study of contrasts & analysis that how common elements like Love, Horror etc, change so much with change in backdrop(s). Language - Hindi. Conversion of Hindi fonts for reading formats is below average, so, used English text. English translation of these stories & comic version will also come in future.


ISBN: 978-1-4660-4974-1

Web-link of 'Indi Horror' eBook -


http://www.smashwords.com/books/view/100432