Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन

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Tuesday, August 13, 2024

कुछ शामें गुज़रती नहीं...


कुछ लंबी शामें सिरहाने पड़ी...
बीतने का नाम न ले रहीं।
कुछ दबी शिकायतें अनकही,
कुछ रूठी सदाएँ अनसुनी।

एक दुनिया को कहते थे सगी,
हमारे मखौल से उसकी महफ़िलें सजने लगी। 

ज़ख्म रिसते हैं,
मर्ज़ की बात नहीं....
सब तो मालूम है,
पर कुछ हाथ नहीं!

जवाब तैयार रखे थे,
सवालों की बिसात नहीं।
इतने सपनों को ठगने वाली...
इस रात की सुबह नहीं।

खैर. .फिर कभी ये दौर याद करेंगे,
गुमसुम हालातों से बात करेंगे...
कभी चलना सिखाया था दुनिया को. ..
फिर कभी इसकी रफ़्तार में साथ चलेंगे।

जय हिंद!

#ज़हन

Monday, June 19, 2023

The Symphony of Bitterness (Poem)

June 2023

 In the looking glass of life, behold,

A reflection of stories, both bitter and bold.

Within the depths of our mirrored soul,

A symphony of flavors, a journey untold.


Gaze upon the glass, what do you see?

A tapestry of self, woven uniquely.

Love, cherish, and honor thy own,

For you are the seed that has fully grown.


In the depths of taste, bitter takes hold,

A metaphor for challenges, strong and bold.

Mother's hand adds bittersweet to the feast,

A symbol of love, nourishing the least.


Embrace the bitter, a teacher profound,

Lessons learned in its depths can be found.

For within its taste, resilience takes flight,

Nourishing our spirit with wisdom's light.

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Sunday, January 15, 2023

काव्य संकलन - वीकेंड वाली कविता (विनोद दूबे)

 ना जाने कैसे इस किताब पर मेरी पोस्ट रह गई। चलिए तब नहीं, तो अब सही...

विनोद दूबे जी ने कुछ बेहतरीन रचनाएं पिरोई हैं। मेरा सौभाग्य रहा कि इन्हें आम जन से पहले मैंने पढ़ा और "वीकेंड वाली कविता" से जुड़ा।


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लगे हाथ एक कविता अपनी भी छपवा ली। :D

Monday, May 9, 2022

Walking down the memory lane - Naftonomix Event

 

‘Naftonomix '12-Beyond the Barrel’ organized by Department of Oil & Gas and Energy Trading, UPES aimed to facilitate students bring out the professional in them by providing platform where they can get an out-of-the book exposure to think out-of-the box and evaluate.

This two day student driven event, flanked by Prof Pokhriyal and other faculty members was initiated to provide students the chance to make a difference through performing & presenting cultural and artistic skills. The technical sub-events were case based context, management paper presentation, virtual trading, Click Pic (photography contest), Symposium, Knack (Poster making competition), Instinct (extempore), Business idea, Brain Storming (quiz) and Vaudeville (cultural event).

To conclude, Naftonomix 2012 proved not just the technical event providing platform only for the sharpening of the executive dexterity in the students to perform but also provided them with an arena of opportunities to step up and display their cultural and artistic skills.

*Won the Vaudeville event.

Saturday, November 6, 2021

5-book anthology series - "What if..."

Namastey! Happy Diwali! 
Co-authored this series with poems, stories on 5 different themes. Prompt based writing challenges oneself to write on random topics outside one's zone. Sharing one poem from book #01.


1) - What if phone was a person

I don't blink or buzz anymore,
No sunshines - no seashores...
or play that funny song when you call or text!

I saved all your voicemails,
I listen to them sometimes,
but I also grow old...
Out of that utility mould,
my updates no longer come,
my battery too is weak,
Forgot the date I was sold,
and I'm told that I am old...

and I am also dangerous,
On that junkyard billboard,
to talk to, to carry on with, to hold
that I am also used up, and besides...
there is no need of me,
that will never again
connect those special two...

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2) - What if Genie would grant you 3 wishes


3) - What if you had a magical wand


4) - What if there were no restaurants


5) - What if there was an anywhere door

Thursday, September 16, 2021

2 Poems in Red Sunflower (Anthology)


2 poems in this anthology by yours truly (will share few stanzas soon). One of the biggest anthologies in terms of total authors, poets (100). Congratulations to the compiler Bhawna Dewangan and team.

Available - Notion Press =*= * Amazon

Saturday, September 11, 2021

Poem in Deep Silence (Anthology)

 'Stealthy silence' (poem) in Deep Silence (anthology), Paperback: 150 pages

ISBN-10: 1685388396

ISBN-13: 978-1685388393

Editors - Sanoj Kumar and Kiran Baghari

Notion Press:

https://lnkd.in/gKFZXMry

Amazon:

https://lnkd.in/gxzxMiKR

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Wednesday, April 21, 2021

ज़रूरी था...

पिछले हफ़्ते मैं और मेरे माता-पिता कोरोना पॉजिटिव हो गए। इस समय मैं अपने पैतृक घर पर उनके साथ हूँ। मेरी पत्नी और पुत्र दूसरे घर में सुरक्षित हैं। 19 अप्रैल को हमारी शादी की तीसरी सालगिरह थी, लेकिन इस स्थिति में उनसे मिलना संभव नहीं था। इस आपदा की घड़ी में, लोगों के इतने बड़े दुखों के बीच यह बात बांटना भी छोटा लग रहा है। बस यह ठीक है कि मेरा बाकी परिवार सुरक्षित है और मैं इस समय माता-पिता के साथ हूँ। मेघा को दिए कुछ उपहारों में हमारे फ़ोटो पर कलाकार Ajay Thapa की बनाई यह पेंटिंग सबसे ख़ास है...

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आगे कभी...पीछे मुड़कर इस साल को देखेंगे,

तुम इससे पूछ लेना..."क्या यह साल ज़रूरी था?"

मैं भी डांट दूंगा..."क्या यह हाल ज़रूरी था?"

ज़िन्दगी के किसी शांत दौर में...फिर इस साल से बात करेंगे।

तब जब तुम मुस्कुरा रही होगी,

बैंक में पड़ी मोटी बचत का हिसाब लगा रही होगी,

बुढ़ापे की दवाई खा रही होगी।

तब जब मैं कहीं फ़ोन नंबर की जगह पिन कोड लिख रहा होऊंगा,

तुम मुझे किसी महीन बात का अंतर समझा रही होगी।

मैं छिप कर मीठा खा रहा होऊंगा,

तुम प्रभव से मेरी शिकायत लगा रही होगी।

उन बातों में कभी इस साल को भी शामिल कर लेंगे,

और मुस्कुराकर इससे कहेंगे,

शायद यह इम्तिहान ज़रूरी था...

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#ज़हन

 Last week, tested positive for Coronavirus along with my parents. I am in home quarantine away from my wife and kid...and today is our third wedding anniversary.

Thursday, February 4, 2021

राम जन्मभूमि पर काव्य प्रस्तुति ऐनिमेशन


राम जन्मभूमि पर बच्चों और आम जन के लिए आसान शब्दों की मेरी इस कविता पर यह ऐनिमेशन की प्रस्तुति देखना बड़ा सुखद लगा। आशा है आपको यह काव्य और एनिमेशन पसंद आएगा। 
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अबसे दीपावली पर दिये कुछ ज़्यादा झिलमिलाएंगे,
5 शताब्दी बाद राम जी वापस अपने घर आएंगे।

सारे देश की इच्छा का रखा आपने मान,
सबसे बड़ी अदालत के फैसले का किया सम्मान,
तब अयोध्या में संभव हो पाया रघुपति राघव राजा राम।

अयोध्या का हुआ पावन श्रृंगार,
सरयु और तटों पर फिर लौटी बहार।

अबसे दीपावली पर दिये कुछ ज़्यादा झिलमिलाएंगे,
5 शताब्दी बाद राम जी वापस अपने घर आएंगे।  

पर्यटन का बड़ा विकल्प बनाया,
करोड़ों लोगों को उनका तीर्थ लौटाया।

कागज़ों-किस्सों से धूल हटाई,
समुदायों की दूरी घटाई।
दिलों से दिलों को मिलाया,
हर किसी को उसका हक़ दिलाया।

अबसे दीपावली पर दिये कुछ ज़्यादा झिलमिलाएंगे,
5 शताब्दी बाद राम जी वापस अपने घर आएंगे।  

आस-पास के क्षेत्रों में बोये विकास के बीज,
धरा से संभावनाएं छूने लगीं क्षितिज।

सपनों की नगरी को हकीकत में बसाया है,
जहां कहा था...मंदिर वहीं बनाया है,
अफवाहों को काम से उड़ाया है!
राम जन्मभूमि का वायदा निभाया है।

पीढ़ियों ने बलिदान दिया,
ऐसा न अब से पहले न अब के बाद होगा,
जाने क्या अच्छे काम किए हमने,
जो राम मंदिर हमारी आँखों के सामने साकार हुआ।
इस मौके पर हाथ बढ़ाएं,
कुछ भी कम नहीं ...
जो भी दिल से संभव हो वह योगदान कर जाएं।
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#ज़हन

Wednesday, January 27, 2021

दिल्ली बड़ी दूर है, किसान भाई! #ज़हन


वह भागने की कोशिश करे कबसे,
कभी ज़माने से तो कभी खुद से...
कोई उसे अकेला नहीं छोड़ता,
रोज़ वह मन को गिरवी रख...अपना तन तोड़ता।

उसे अपने हक़ पर बड़ा शक,
जिसे कुचलने को रचते 'बड़े' लोग कई नाटक!
दुनिया की धूल में उसका तन थका,
वह रोना कबका भूल चुका।

सीमा से बाहर वाली दुनिया से अनजान,
कब पक कर तैयार होगा रे तेरा धान?
उम्मीदों के सहारे सच्चाई से मत हट,
देखो तो...इंसानी शरीर का रोबोट भी करने लगा खट-पट!

अब तुझे भीड़ मिली या तू भीड़ को मिल गया,
देख तेरा एक चेहरा कितने चेहरों पर सिल गया।
यह आएगा...वह जाएगा,
तेरे खून से समाज सींचा गया है...आगे क्या बदल जाएगा?

तेरे ज़मीन के टुकड़े ने टेलीग्राम भेजा है,
इस साल अच्छी फसल का अंदेशा है।
देख जलते शहर में लगे पोस्टर कई,
खुश हो जा...इनमें तेरी पहचान कहीं घुल गई।
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Sunday, January 10, 2021

काव्य कॉमिक्स और फ्रीलेंस टैलेंट्स कॉमिक्स का सफर #ज़हन

 नमस्ते! 2009-2010 में मैंने मिशन बनाया कि सभी सक्रीय (खासकर शुरुआत कर रहे) कलाकारों के साथ कॉमिक्स बनाईं जानी चाहिए। तबसे 2018 तक कम पैनल वाली 4 पेज से लेकर 22 पेज की कई शार्ट कॉमिक्स बनाई। इनमें मैंने हुसैन ज़ामिन, तदम ग्यादू समेत बहुत से कलाकारों के साथ काम किया चाहे उन्होंने पेंसिल, कलरिंग या शब्दांकन किया। कॉमिक्स की 2 श्रेणियां थी, सामान्य थीम पर किसी कहानी वाली कॉमिक और काव्य कॉमिक (इनमें कविता की लाइन के अनुसार दृश्य लगाए जाते थे)। उनमें से कुछ कॉमिक्स के कवर पोस्ट के साथ लगा रहा हूं।

पता नहीं उस समय थर्ड पार्टी से काम "दिखाने" की क्या भूख थी कि सारा काम करके कुछ प्रकाशकों को दे देते थे कि "आप अपने सोशल मीडिया पर अपने लोगो के साथ छाप दो", कभी उसपर खुद ही 1 रुपये तक की बात नहीं हुई जो मेरी ही गलती है, हम बस इसमें खुश हो जाते थे कि प्रकाशक के पेज पर अपना काम आया मुझे खुद अपनी प्रोफ़ाइल या पेज पर नहीं डालना पड़ा। कुछ साल बाद यह काम अपनी ही प्रोफ़ाइल और कई साइटों पर काम पोस्ट करने लगा। तब एक छात्र या नए निजी नौकरीपेशा के तौर पर कलाकारों को पैसे देना और काम मैनेज करना आप समझ ही सकते हैं इसलिए ज़्यादा पेज या पैनल नहीं हो पाते थे। अब ये सभी कॉमिक्स इंटरनेट पर कई साइटों पर उपलब्ध हैं। जैसे कि Readwhere, Scribd आदि

जब लगा कि इतने कलाकारों के साथ काम करना मुश्किल है, तो 3 राउंड वाली फ्रीलांस टैलेंट्स चैंपियनशिप 2015-16 में लेखकों-कलाकारों की जोड़ी रखी जिसके तहत 54 क्रिएटिव ने भाग लिया। इस दौरान कुछ काम फिक्शन कॉमिक्स, राज कॉमिक्स के सौजन्य से प्रकाशित हो गए। उन कलाकारों को भी अपनी सूची में शामिल कर लिया। फिर घर-परिवार में ये बातें प्राथमिकता से भूली-बिसरी बन गईं। आखिर में कॉमिक्स कम्युनिटी में सक्रीय कुछ कलाकारों के साथ कोई कॉमिक न बना पाने का मलाल रहा। इनमें शामिल हैं - Uttam Chand, Navneet Singh, Vipin Negi, Aditya Kishore, Ravi Biruly, Anshu Dhusia, Saket Kumar, Sumit Sinha, Rudraksh आदि। आशा है आगे कभी किसी प्रोजेक्ट में आप लोगों के साथ काम करने का मौका मिलेगा। ❤

नए साल की शुभकामनाएं!

Friday, September 4, 2020

फिर कभी सही...

 

कुछ महीने पहले स्कूल की एक कॉपी मिली...
उंगलियां पन्ने पलटने को हुई।
दफ़्तर को देर हो रही थी,
उंगलियों से कहा फिर कभी सही...

कॉपी ने कहा ज़रा ठहर कर तो देख लो,
9वीं क्लास की चौथी बेंच से झांक लो!
"फिर कभी सही"

आज याद आया तो देखा...
कॉपी रूठ कर फिर से खो गई...
#ज़हन

Monday, April 20, 2020

आप दोनों मेरे!


दो साल पहले (19 April 2018) को जीवन में एक बदलाव आया। कुछ आदतें बदली और कुछ आदतें बदलवाई। थोड़ी बातें और ढेर सारी यादें बनाई। एक रचनात्मक व्यक्ति की प्राथमिकताएं अलग होती हैं...उसे दुनिया में रहना भी है और दुनियादारी में पड़ने से भी परहेज़ है। ऐसे में डर होता है कि क्या शादी के बाद भी यह सोच बनी रहेगी या नहीं? पहले मेघा और अब प्रभव ने मिलकर मुझे जीवन के कई पाठ पढ़ाए। इन्होनें बताया कि प्राथमिकताएं कोई बाइनरी कोड नहीं जिन्हें या तो रखा जाए या छोड़ा जाए...इंसान नए नज़रिये और जीने के ढंग के साथ प्राथमिकताओं में कुछ बदलाव करके भी खुश रह सकता है। मेरे मोनोक्रोमेटिक जीवन को खूबसूरत पेंटिंग बनाने के लिए शुक्रिया मेघा और प्रभव! <3 font="">

आप दोनों के लिए 2 रचनाएं:

कुछ मैंने समझा...कुछ तुमने माना,
नई राह पर दामन थामा।
कुछ मैंने जोड़ा...कुछ तुमने संजोया,
मिलकर हमने 'घर' बनाया।
दोनों की जीत...दोनों की हार,
थोड़ी तकरार...ढेर सा प्यार।

मेरी नींद के लिए अपनी नींद बेचना,
दफ्तर से घर आने की राह देखना।
माथे की शिकन में दबी बातें पढ़ना,
करवटों के बीच में थपथपा कर देखना।

साथ में इतनी खुशियां लाई हो,
एक घर छोड़ कर...मेरा घर पूरा करने आई हो।
पगडंडियों से रास्ता सड़क पर मुड़ गया है...
सफर में एक नन्हा मुसाफिर और जुड़ गया है।

चाहो तो अब पूरी ज़िंदगी इन दो सालों की ही बातें दोहराती रहो...
लगता है यह सफर चलता रहे...कभी पूरा न हो!

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(हास्य) [ध्यान दें - ये दोनों ही मेन लीड हैं, क्योंकि मेरी प्रोफाइल है इसलिए खुद को नायक बना रहा हूँ।]

मैं उपन्यास हूँ...आप दोनों मेरे प्लाट ट्विस्ट और मेन लीड,
मैं छुटभैया नेता हूँ...आप दोनों मेरे जुटाए कैबिनेट मंत्री और भीड़।
मैं अन्ना हजारे हूँ...आप दोनों मेरे संघर्ष और अनशन,
मैं वीडियो गेम हूँ...आप दोनों मेरे प्लेयर और लास्ट स्टेज के ड्रैगन।

मैं एसयूवी हूँ...आप दोनों मेरे चेसिस और इंजन,
मैं सुबह की सांस हूँ...आप दोनों मेरे माउथवाश और मंजन।
मैं ट्रैक्टर हूँ...आप दोनों मेरे कल्टीवेटर और डाला,
मैं शक्तिमान हूँ...आप दोनों मेरे किलविश और कपाला!

मैं सब्जीवाला हूँ...आप दोनों मेरा ठेला और टोकरा, 
मैं धूम सीरीज़ हूँ...आप दोनों मेरे अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा!
मैं हलवाई हूँ...आप दोनों मेरी दिवाली और मिठाई,
मैं तापसी पन्नू हूँ...आप दोनों मेरी पीआर एजेंसी और बीफिटिंग रिप्लाई!

मैं अजय देवगन हूँ...आप दोनों मेरे रोहित शेट्टी और काजोल,
मैं बीजेपी हूँ...आप दोनों मेरे आरएसएस और बजरंग दल।
मैं इंदिरा गांधी हूँ...आप दोनों मेरे भारत रत्न और इमरजेंसी,
मैं पाकिस्तान हूँ...आप दोनों मेरे टेररिज़्म और इंसरजेंसी।  

मैं फ़ुटबॉल हूँ...आप दोनों मेरे जूता और लात, [ओ भाई...मारो मुझे मारो]
मैं हालात हूँ...आप दोनों मेरी यादें और जज़्बात।
मैं बाबा रामदेव...आप दोनों मेरे योग और पतंजलि,
मैं धड़कन...आप दोनों मेरे देव और अंजली।

जीवन में नहीं रहा कोई अभाव,
मोहित को मिल गए मेघा और प्रभव।
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#ज़हन

Friday, August 16, 2019

My Stories on Kuku FM #ज़हन


Talented Kuku FM team is creating audio stories, audio books on my stories and poems. 🤖 🥳
Kuku FM वेबसाइट और ऐप्लिकेशन पर सुनिए कई जॉनर में मेरी कहानियाँ और काव्य। पहली दो कहानियों के लिंक ये रहे -





जल्द ही और कहानियाँ भी...

Saturday, July 13, 2019

शहर के पेड़ से उदास लगते हो...(नज़्म)

दबी जुबां में सही अपनी बात कहो,
सहते तो सब हैं...
...इसमें क्या नई बात भला!
जो दिन निकला है...हमेशा है ढला!
बड़ा बोझ सीने के पास रखते हो,
शहर के पेड़ से उदास लगते हो...

पलों को उड़ने दो उन्हें न रखना तोलकर,
लौट आयें जो परिंदों को यूँ ही रखना खोलकर।
पीले पन्नो की किताब कब तक रहेगी साथ भला,
नाकामियों का कश ले खुद का पुतला जला।
किसी पुराने चेहरे का नया सा नाम लगते हो,
शहर के पेड़ से उदास लगते हो...

साफ़ रखना है दामन और दुनियादारी भी चाहिए?
एक कोना पकड़िए तो दूजा गंवाइए...
खुशबू के पीछे भागना शौक नहीं,
इस उम्मीद में....
वो भीड़ में मिल जाए कहीं।
गुम चोट बने घूमों सराय में...
नींद में सच ही तो बकते हो,
शहर के पेड़ से उदास लगते हो...

फिर एक शाम ढ़ली,
नसीहतों की उम्र नहीं,
गली का मोड़ वही...
बंदिशों पर खुद जब बंदिश लगी,
ऐसे मौकों के लिए ही नक़ाब रखते हो?
शहर के पेड़ से उदास लगते हो...

बेदाग़ चेहरे पर मरती दुनिया क्या बात भला!
जिस्म के ज़ख्मों का इल्म उन्हें होने न दिया।
अब एक एहसान खुद पर कर दो,
चेहरा नोच कर जिस्म के निशान भर दो।
खुद से क्या खूब लड़ा करते हो,
शहर के पेड़ से उदास लगते हो...
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#ज़हन

Wednesday, June 19, 2019

जब क्रिकेट से मिलने बाकी खेल आए...(कविता) #ज़हन


एक दिन सब खेल क्रिकेट से मिलने आए,
मानो जैसे दशकों का गुस्सा समेट कर लाए।
क्रिकेट ने मुस्कुराकर सबको बिठाया,
भूखे खेलों को पाँच सितारा खाना खिलाया।

बड़ी दुविधा में खेल खुस-पुस कर बोले... 
हम अदनों से इतनी बड़ी हस्ती का मान कैसे डोले?
आँखों की शिकायत मुँह से कैसे बोलें?
कैसे डालें क्रिकेट पर इल्ज़ामों के घेरे?
अपनी मुखिया हॉकी और कुश्ती तो खड़ी हैं मुँह फेरे...
हिम्मत कर हाथ थामे टेनिस, तीरंदाज़ी आए,
घिग्घी बंध गई, बातें भूलें, कुछ भी याद न आए...

"क...क्रिकेट साहब, आपने हमपर बड़े ज़ुल्म ढाए!"

आज़ादी से अबतक देखो कितने ओलम्पिक बीते, 
इतनी आबादी के साथ भी हम देखो कितने पीछे!

माना समाज की उलझनों में देश के साधन रहे कम,
बचे-खुचे में बाकी खेल कुछ करते भी...तो आपने निकाला दम!

इनकी हिम्मत से टूटा सबकी झिझक का पहरा, 
चैस जैसे बुज़ुर्ग से लेकर नवजात सेपक-टाकरा ने क्रिकेट को घेरा...

जाने कौनसे नशे से तूने जनता टुन्न की बहला फुसला,
जाने कितनी प्रतिभाओं का करियर अपने पैरों तले कुचला...

कब्बडी - "वर्ल्ड कप जीत कर भी मेरी लड़कियां रिक्शे से ट्रॉफी घर ले जाएं...
सात मैच खेला क्रिकेटर जेट में वोडका से भुजिया खाये?"

फुटबॉल - "पूरी दुनिया में पैर हैं मेरे...यहां हौंसला पस्त,
तेरी चमक-दमक ने कर दिया मुझे पोलियोग्रस्त।"

बैडमिंटन - "हम जैसे खेलों से जुड़ा अक्सर कोई बच्चा रोता है,
गलती से पदक जीत ले तो लोग बोलें...ऐसा भी कोई खेल होता है?"

धीरे-धीरे सब खेलों का हल्ला बढ़ गया,
किसी की लात...किसी का मुक्का क्रिकेट पर बरस पड़ा।

गोल्फ, बेसबॉल, बिलियर्ड वगैरह ने क्रिकेट को लतिआया,
तभी झुकी कमर वाले एथलेटिक्स बाबा ने सबको दूर हटाया...

"अपनी असफलता पर कुढ़ रहे हो...
क्यों अकेले क्रिकेट पर सारा दोष मढ़ रहे हो?
रोटी को जूझते घरों में इसे भी तानों की मिलती रही है जेल,
आखिर हम सबकी तरह...है तो ये भी एक खेल!
वाह, किस्मत हमारी,
यहाँ एक उम्र के बाद खेलना माना जाए बीमारी।
ये ऐसे लोग हैं जो पैकेज की दौड़ में पड़े हैं...
हाँ, वही लोग जो प्लेस्कूल से बच्चों का एक्सेंट "सुधारने" में लगे हैं। 
ऐसों का एक ही रूटीन सुबह-शाम,
क्रिकेट के बहाने सही...कुछ तो लिया जाता है खेलों का नाम।

हाँ, भेड़चाल में इसके कई दीवाने,
पर एक दिन भेड़चाल के उस पार अपने करोड़ों कद्रदान भी मिल जाने!
जलो मत बराबरी की कोशिश करो,
क्रिकेट नहीं भारत की सोच को घेरो!

समाप्त!
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Tuesday, October 16, 2018

#Updates October 2018


Freelance Talents nomination certificate India 5000 Best MSME Award 2018


Event - Sooraj Pocket Books: Baaten, Kitaben, Mulaqaten #2 (30 September 2018)


Google Local Guides Level #06


Event appearance News Dainik Jagran (October 2018) and Dainik Bhaskar (September 2018)

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Dawriter Top Writers list


My Chess24 statistics

Friday, August 3, 2018

Editor - Ibadat Ishq ki Poetry Collection (Vikas Durga Mahto)


Book - Ibadat Ishq ki (Poetry Collection)
Poet - Vikas Durga Mahto
My role - Editor
Publisher: Sooraj Pocket Books; First edition (31 July 2018)
Language: Hindi
ISBN-10: 9388094018
ISBN-13: 978-9388094016
Package Dimensions: 23 x 18 x 3 cm

इस दौर में लोगों को काव्य से बांधना मुश्किल होता जा रहा है। बचपन से उँगलियों पर रखे मनोरंजन के हर साधन के बीच काव्य कहीं रूठ सा गया है। विकास महतो जैसे कवियों के कारण काव्य जैसे कुछ समय के लिए मान जाता है। किसी ग्लेशियर से अभी-अभी पिघली पावन धारा से उनके शब्द मन में घर कर लेते हैं। बाहरी ट्रेंड को देखकर बहुत से कवि खुद को बंदिशों में रखकर रचना सोचते हैं। ऐसी रचनाएँ कभी अच्छी बन सकती हैं पर उनपर दिखावे की परत साफ़ झलकती है, जैसे वो रचनाकार समाज के मानकों को ज़बरदस्ती रिझाना चाहते हों। विकास की कविताओं, ग़ज़ल-नज़्म काव्य की ख़ास बात ये है कि उनमें किसी तरह का बनावट नहीं है। हर रचना में अनेक भावों का अद्भुत घनत्व झलकता है। उनके मन से निकली भावनाओं का पाठक के मन से जुड़ना तय होता है। कविताओं को कुछ श्रेणियों में बांटा गया है और हर श्रेणी अपने में पूरी लगती है। किताब के लिए दो अतिरिक्त रचनाओं को लिखते हुए मैं डर रहा था कि क्या मैं विकास की रचनाओं के साथ न्याय कर पा रहा हूँ...आशा है आपको किताब पढ़ते हुए वैसा रस मिलेगा जैसा मुझे संपादन करते हुए मिला।