Saturday, May 16, 2026
When Businesses Optimize Themselves Into Distrust (Article)
Monday, December 13, 2021
सरकारी संन्यास (हास्य व्यंग)
Wednesday, January 27, 2021
दिल्ली बड़ी दूर है, किसान भाई! #ज़हन
Sunday, September 6, 2020
संजय राउत, आप स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर पानी फेर रहे हैं!
नमस्ते, संजय राउत जी! आप जिस पद पर हैं और जहाँ के लिए लोगों ने आपको चुना है उसको देखते हुए आप थोड़ा सोच कर बोला करें। कभी आप फेसबुक पर किसी कमेंट को लाइक करने वाली लड़कियों की गिरफ्तारी को जायज़ बता देते हैं, कभी एक समुदाय के वोट करने के हक़ को वापस लेने को कह देते हैं, कभी मृत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के पिता के.के. सिंह के बारे में ऐसी बात कह देते हैं जिसका मामले से कोई सरोकार ही नहीं है। अब आप एक अभिनेत्री को गाली दे रहे हैं। पूरे मीडिया को दलाल बता रहे हैं। आप भी तो आँखें मूँद कर एक तरफ खड़े हैं। खुद के लिए कोई विशेषण नहीं सोचा आपने?
ये तो ऐसी बातें हैं जो राष्ट्रीय पटल पर चर्चित हो गई, इनके अलावा स्थानीय तो आपने न जाने कितना अनाप-शनाप बोला और किया होगा। कृपया, थोड़ी शर्म कर लें। बार-बार इतना उल्टा-सीधा बोलते हुए मैंने सिर्फ़ राखी सावंत और दीपक कलाल जैसे लोगों को देखा है। क्या आप खुद को उनकी श्रेणी में रखना चाहते हैं? ऊपर से अपने बचाव में हास्यास्पद तर्क दे रहे हैं और अहंकार से भरी बातें, ट्वीट, पोस्ट आदि कर रहे हैं। आपकी शह में श्री अनिल देशमुख जैसे कुछ नेता भी आपकी बोली बोल रहे हैं। शिवसेना के कार्यकर्ता कोरोना के समय भीड़ में कंगना के पुतले जला रहे हैं। इतना अहं, इतनी असहिष्णुता, और इतनी छोटी सोच कहाँ लेकर जाएंगे?
रही बात महाराष्ट्र या मुंबई के अपमान की तो आपने तो पूरे नारी जगत का अपमान किया है। दुनिया की 380 करोड़ महिलाएं ज़्यादा हुई या 12.5 करोड़ महाराष्ट्र (या 2 करोड़ मुंबई)। अगर कंगना रनौत को एक बार माफ़ी मांगनी चाहिए, तो उस हिसाब से आपका तो दर्जनों बार माफ़ी माँगना बनता है।
मैं आपसे माफ़ी मांगने को नहीं कहूंगा यह आपका अपना निर्णय है, लेकिन सोचिये ज़रूर...यह क्षेत्रवाद का बाजा कब तक बजाते रहेंगे? इससे ऊपर उठिए, देशहित देखिए! समाज का भला, स्त्रियों के अधिकार एक बड़े नज़रिये से देखने की कोशिश करें। नहीं तो आपकी पार्टी भी क्षेत्र में सिमट कर रह जाएगी। बाकी ऐसा नहीं है कि आपने कुछ अच्छा नहीं किया या कहा पर इन बातों पर गौर करके आप अगर खुद में बदलाव करेंगे तो और बेहतर समाज सेवा कर पाएंगे।
धन्यवाद!#ज़हन
Monday, May 25, 2020
Color-blind Baalam (Book)
Monday, April 20, 2020
आप दोनों मेरे!
Wednesday, February 5, 2020
तंज़ (सामाजिक कहानी) #ज़हन
Friday, November 22, 2019
कुछ मीटर पर...ज़िंदगी! (कहानी)
#ज़हन
Wednesday, June 19, 2019
जब क्रिकेट से मिलने बाकी खेल आए...(कविता) #ज़हन
Wednesday, August 8, 2018
गृहणी को इज़्ज़त की भीख (कहानी) #ज़हन
Wednesday, April 11, 2018
उल्लास की आवाज़ (कहानी) #ज़हन
जब हर प्रयास निरर्थक लगने लगा तो डॉक्टर कोटल ने स्वयं जंगलियों के बीच जाकर उन्हें समझाने का फैसला किया। इस जोखिम भरे विचार पर दल के बाकी सदस्य पीछे हट गये। किसी तरह डॉक्टर केवल अनुवादक को अपने साथ रहने के लिए समझा पाये। बिना सुरक्षा के जंगली सीमा में घुसते ही दोनों को बंदी बना लिया गया। कुछ कबीलों की संयुक्त सभा में डॉक्टर और अनुवादक को एक खंबे से बाँध कर उनकी मंशा और पिछले कामों के बारे में पूछा गया।

























