Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन

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Sunday, January 10, 2021

काव्य कॉमिक्स और फ्रीलेंस टैलेंट्स कॉमिक्स का सफर #ज़हन

 नमस्ते! 2009-2010 में मैंने मिशन बनाया कि सभी सक्रीय (खासकर शुरुआत कर रहे) कलाकारों के साथ कॉमिक्स बनाईं जानी चाहिए। तबसे 2018 तक कम पैनल वाली 4 पेज से लेकर 22 पेज की कई शार्ट कॉमिक्स बनाई। इनमें मैंने हुसैन ज़ामिन, तदम ग्यादू समेत बहुत से कलाकारों के साथ काम किया चाहे उन्होंने पेंसिल, कलरिंग या शब्दांकन किया। कॉमिक्स की 2 श्रेणियां थी, सामान्य थीम पर किसी कहानी वाली कॉमिक और काव्य कॉमिक (इनमें कविता की लाइन के अनुसार दृश्य लगाए जाते थे)। उनमें से कुछ कॉमिक्स के कवर पोस्ट के साथ लगा रहा हूं।

पता नहीं उस समय थर्ड पार्टी से काम "दिखाने" की क्या भूख थी कि सारा काम करके कुछ प्रकाशकों को दे देते थे कि "आप अपने सोशल मीडिया पर अपने लोगो के साथ छाप दो", कभी उसपर खुद ही 1 रुपये तक की बात नहीं हुई जो मेरी ही गलती है, हम बस इसमें खुश हो जाते थे कि प्रकाशक के पेज पर अपना काम आया मुझे खुद अपनी प्रोफ़ाइल या पेज पर नहीं डालना पड़ा। कुछ साल बाद यह काम अपनी ही प्रोफ़ाइल और कई साइटों पर काम पोस्ट करने लगा। तब एक छात्र या नए निजी नौकरीपेशा के तौर पर कलाकारों को पैसे देना और काम मैनेज करना आप समझ ही सकते हैं इसलिए ज़्यादा पेज या पैनल नहीं हो पाते थे। अब ये सभी कॉमिक्स इंटरनेट पर कई साइटों पर उपलब्ध हैं। जैसे कि Readwhere, Scribd आदि

जब लगा कि इतने कलाकारों के साथ काम करना मुश्किल है, तो 3 राउंड वाली फ्रीलांस टैलेंट्स चैंपियनशिप 2015-16 में लेखकों-कलाकारों की जोड़ी रखी जिसके तहत 54 क्रिएटिव ने भाग लिया। इस दौरान कुछ काम फिक्शन कॉमिक्स, राज कॉमिक्स के सौजन्य से प्रकाशित हो गए। उन कलाकारों को भी अपनी सूची में शामिल कर लिया। फिर घर-परिवार में ये बातें प्राथमिकता से भूली-बिसरी बन गईं। आखिर में कॉमिक्स कम्युनिटी में सक्रीय कुछ कलाकारों के साथ कोई कॉमिक न बना पाने का मलाल रहा। इनमें शामिल हैं - Uttam Chand, Navneet Singh, Vipin Negi, Aditya Kishore, Ravi Biruly, Anshu Dhusia, Saket Kumar, Sumit Sinha, Rudraksh आदि। आशा है आगे कभी किसी प्रोजेक्ट में आप लोगों के साथ काम करने का मौका मिलेगा। ❤

नए साल की शुभकामनाएं!

Tuesday, September 1, 2020

लेखक की कहानी, लेखक की ज़ुबानी-29 - आलोक कुमार और मोहित शर्मा ज़हन


लेखक अलोक कुमार जी के साथ मेरी बातचीत। 🎙️ 
काफ़ी मुद्दों पर बात हुई, जो रह गए उन्हें निपटाते रहेंगे। आप लोग स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखें। #ज़हन
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Thursday, August 3, 2017

Kavya Comic - Matlabi Mela (मतलबी मेला)


New poetry Comic "Matlabi Mela" published, based on my 2007 poem of the same name. 
*Bonus* Added an extra poem खाना ठंडा हो रहा है... in the end.
Language: Hindi, Pages: 22
Illustration - Anuj Kumar
Poetry & Script - Mohit Trendster
Coloring & Calligraphy - Shahab Khan


Available (Online read or download):
ISSUU, Freelease, Slideshare, Ebook Home, Archives, Readwhere, Scribd, Author Stream, Fliiby, Google Books, Play store, Daily Hunt, Smashwords, Pothi and Ebook Library etc.

Sunday, March 26, 2017

Jug Jug Maro #2 - Nashedi Aurat (Alcoholic Woman)


 जुग जुग मरो #2
नशे, दारु की लथ में अपना पति खो चुकी औरत नशे में ही उसे ढूँढ रही है और पूछ रही है ऐसी क्या ख़ास बात है नशे में जो कितनी आसानी से कितनी ज़िन्दगीयां लील लेता है। इस बार एक कविता और एक नज़्म के साथ पेश है - नशेड़ी औरत! (काव्य कॉमिक्स) 
Illustrator - Amit Albert
Poet, Script - Mohit Trendster
Colorist - Harendra Saini
Letterer - Youdhveer Singh

Read or Download 
(Combined Part 1-2 Ecomic available on Google Play, Google Books, Readhwhere, Dailyhunt, Scribd, AuthorStream, ISSUU, Archives and other major ebook websites)

Saturday, January 21, 2017

जुग जुग मरो #1 - मुआवज़ा (काव्य कॉमिक)


जुग जुग मरो सीरीज की पहली कविता और कॉमिक्स के संगम से बनी काव्य कॉमिक्स, "मुआवज़ा" शराबियों और सरकार पर कटाक्ष है, जो अपने-अपने नशे में चूर पड़े रहते हैं और जब तक उन्हें होश आता है तब कुछ किया नहीं जा सकता। अपना मन बहलाने के लिए कड़े कदम और राहत की मोक ड्रिल की जाते है और फिर सब पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। मुश्किल सामने पड़ी चुनौतियाँ नहीं बल्कि उनसे निपटने की नियत रखने में है। समाज का एक तबका इतना व्यर्थ माना जाता है कि 10 जाएं या हज़ार मजाल है जो समाज ठिठक तक जाए। 


चित्रांकन - अभिलाष पांडा 
काव्य, पटकथा - मोहित शर्मा ज़हन 
रंग - हरेन्द्र सैनी, ज्योति सिंह 
शब्दांकन - युद्धवीर सिंह
कवर - कादिर नाकिप्लर

Friday, June 3, 2016

Kavya Comics Vol. 3 and Vol. 4 (Freelance Talents)


Compiled many short kavya comics into two volumes - Kavya Comics Volume 3 (36 Pages), Kavya Comics Volume 4 (44 Pages). Timeline covered: 2011-2015 

Available - Google Books, Autorstream, Readwhere, Issuu and all leading websites/portals.

Wednesday, April 29, 2015

Kavya Comics News


*) - "Meri Aazadi ka Ruab" exclusively at Fenil Comics website and social media pages. by yours truly, Yash (Harish Atharv) Thakur, Soumendra Majumder, Ajay Thapa and Manabendra Majumder. 

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*) - Page from another WIP project "Desh Maange Mujhe" with Prince Ayush.

Saturday, August 2, 2014

Monday, December 5, 2011

Poetic Comics Editorial # 03 (Behri Duniya)



”बहरी दुनिया” रैगिंग पर आधारित एक संदेश है, यह कविता मैंने 2006 मे लिखी थी तब यह समस्या अब के मुकाबले बड़ी थी। भारत में पिछले दो दशकों में जागरूकता के स्तर मे काफी सुधार हुआ है। पहले की तुलना में अब शिक्षा की अहमियत समझी जा रही है पर इस सुधार के अलावा तेज़ी से बढती जनसँख्या की वजह से बड़ी डिग्रीयां भी जीवन यापन के लिये विषम होती जा रहे समाज मे छोटी पड़ रहीं है। विज्ञानं, कला और इनके अंतर्गत पढ़ायी जाने वाली बातों पर तो शासन और जनता का ध्यान रहता है पर डिग्री पाकर पैसा कमाने की होड़ मे मानव मूल्यों का महत्व घट रहा है और यही रैगिंग जैसे सामाजिक अभिशाप के पनपने का कारण है।
रैगिंग जो आज बन गयी उसका प्रारंभिक अर्थ कुछ और था, यानी अपने जूनियर विद्यार्थियों को नये माहौल से सहज करना और उनसे जान पहचान बढ़ाना ताकि भविष्य मे छात्र किसी ज़रुरत में एक दूसरे के काम आ सके। अक्सर होता भी यह है कि शैक्षिक वर्ष की शुरुआत में ऐसी गतिविधियों घर से दूर पहली बार आये छात्र-छात्राओं को आने वाले समय के लिए तैयार करती है।

ज़्यादातर छात्र किसी का बुरा नहीं चाहते पर अपने दल के कुछ शरारती तत्वों को दल के अच्छे सदस्य दोस्ती के नाते रोकते नहीं है जिसका नतीजा ये होता है की उन खुराफाती-दूषित लोगो को मिली छुट के अनुसार मनमानी की जाती है। जूनियरस से बदसलूकी होती है, उन्हें अपमानजनक स्थितियों में डाला जाता है, उनसे अमानवीय, भयावह काम करवाये जाते है। कभी-कभी इलास्टिक की तरह इंसान को उसकी हद तक…तब तक खींचा जाता है जब तक वो मानसिक या शारीरिक रूप से ‘टूट’ ना जाये। अब तक घर के संरक्षित माहौल मे जीते आये कुछ युवा ये बदलाव सहन नहीं कर पाते और आत्महत्या तक कर लेते है। कितना अजीब सौदा है ना की थोड़ी देर या कुछ दिन के मज़े के लिए किसी को गहरा मानसिक या शारीरिक आघात देना? रैगिंग करने वाले तर्क देते है की ये तो हर साल की बात हुयी …पिछले साल हमारी रैगिंग हुयी थी, अभी हमने किया, अगले साल तुम करना। गलत काम को सही नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब इस से कई लोग पागल हो गए हों, कईयों ने आत्महत्या की हो या उनका सामाजिक दायरा हमेशा के लिए उन्ही तक सिमट कर रह गया हो। अगर कल कोई खूनी, चोर या बलात्कारी अपना गुनाह छुपाने के लिए ऐसे तर्क दे तो आपका खून खौल जायेगा। कानून के डर से अब शैक्षिक संस्थानों मे ऐसी घटनाएँ काफी कम हो गयी है पर उसी डर से अब कई सीनियरस अपने से छोटो की मदद या उनसे व्यवहार तक रखने से कतराते है। वैसे भारत जैसे विशाल देश मे कम घटनाओ का मतलब भी हजारो घटनायें होता है। शैक्षिक संस्थानों को प्रोफेसरस की देख रेख मे बड़ो और छोटों की सभायें नियमित रूप से आयोजित करनी चाहिये।
सौमेंद्र ने अपने अंदाज़ मे एक बार फिर सुन्दर चित्रण किया है, फेनिल शेरडीवाला जी को धन्यवाद। सामाजिक विषयों पर फेनिल जी सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहते है। अंत मे यही कहूँगा कि प्यार से कमायी इज्ज़त ज्यादा टिकाऊ होती है और किसी व्यक्ति से कुछ महीने डर से मिली इज्ज़त के बाद उसी से ज़िन्दगी भर गालियाँ ही मिलती है।
आपका मोहित शर्मा

Behri Duniya exclusively at Fenil Comics. Artwork by Soumendra Majumder and Colors & Effects by Manabendra Majumder.

Monday, January 7, 2008

Monday, December 11, 2006