Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन

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Tuesday, August 10, 2010

मेरी आँखें, तेरे सपने



"राम, बुलंदशहर पुलिस एथलीट मीट जीत गया!!!"

राम बस नहीं था उनके घर के सदस्य का नाम,
वो तो था पूरे गाँव की शान.
इसमे थे परिवार के कई बलिदान,
सबने मिल कर चुकाया था "इस" राम का दाम.

पर अभी और संघर्ष देखने थे बाकी,
पिता पर बढ़ता जा रहा था काम का बोझ काफी.
पर उनकी आँखों मे तब थकान ना दिखती,
जब गाँव मे राम के चर्चे और खबरे होती.

अंतिम वक़्त तक उन्होंने अपने बेटे के सपनो को अपनी आँखों से जिया,
इरादा तो पक्का था पर बूढे शरीर ने धोखा दे दिया.

मृत आँखों मे भी बेटे की सफलता देखने की व्याकुलता साफ़ दिखती,
यूँ बेवक्त अपनी हार की झुंझलाहट से जैसे बंद थी उनकी मुट्ठी.

बिलखते बेटे ने जब पार्थिव शरीर को आग से जलाया,
तब शहर से उसका दोस्त ये खबर लाया.........

"राम, तू नेशनल कैंप के लिए सेलेक्ट हो गया."

Thursday, July 29, 2010

देवता पिता

पिता शब्द भले ही माँ के बाद आता हो पर जीवन मे उनका महत्व उतना ही है। बलिदान, परिश्रम, प्रेम के मामले मे आमतौर पर पिता का योगदान अनदेखा कर दिया जाता है। ऊपर से कुछ प्रतिशत बुरे से उदाहरणों से करोड़ो अच्छे पिताओं को नाप दिया जाता है। यह कविता सभी प्रेरणादायक, बलिदानी, स्नेहिल और परिश्रमी पिताओं को समर्पित। 

वो अख़बार ओढ़कर चिंता करते है सारे घर की,
चाहे शक्ल पर थकान दिखाए दफ्तर की।

कौन कहता है पुरुषो मे भावनायें होती है कम,
पापा की ज़ोरदार डांट ध्यान से 'खाओ' वो उनके प्यार से होती है नम।

इनको क्या पता चलेगा ये सोचकर आप से अक्सर होशियारी हो जाती है अपने आप,
पर आप ये भूल जाते है की वो रिश्ते मे लगते है आपके बाप।

चेहरे से ही मन की बात जान जाते,
वो हमको सिर्फ सही रास्ते पर चलता देखना चाहते।

अपेक्षाओ के बोझ तले,
उपेक्षाओ के संग चले.....
जीवन के हर मोड़ पर कभी मदद करते, कभी देते नसीहतें,
जैसे इंसान नहीं कोई ग्रह-नक्षत्र हो जो टाले अपनी छाँव में मुसीबतें।

ये ज़रूरी तो नहीं की हर वक़्त पिता अपना प्यार जताएँ,
क्या ये उनका स्नेह नहीं की वो हमें खुश रखते है मारकर अपनी इच्छाएँ।

अक्सर माँ रुपी देवी के पीछे छिपा दिए जाते है अनगिनत देवता तुल्य पिता,
तभी शायद उनपर ना कोई प्राईम टाईम सीरियल...न लाखो कॉलम, फिल्मे व आर्टिकल...और ना ही पुरुष आयोग बना।