मार्च में पॉकेट एफएम में शामिल हुआ और आते ही कुछ शोज़ की ज़िम्मेदारी मिली। जहाँ प्रतिभावान लेखक, वॉइस ओवर कलाकार मौजूद थे। इनमें सबसे ज़्यादा चुनौतीपूर्ण शो था 'चाणक्य'...लेखक श्री पंकज चांदपुरी और पूर्व संपादक श्री पंकज कांडपाल की मेहनत की सराहना करनी होगी। इसका कुछ अन्य भाषाओं जैसे तेलुगू, कन्नड़ आदि में भी अनुवाद शुरू हुआ। अच्छी रेटिंग और श्रोताओं की संख्या के कारण कम समय में ही शो को सोशल मीडिया और ऐसे लिस्टिकल में जगह मिलने लगी है। अपना प्यार बनाए रखें!
Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन
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Friday, June 3, 2022
Thursday, May 24, 2018
Comics Theory Issue #1 Update
Comics Theory's Ghosts of India Issue 1, released now! (Anthology includes 1 short comic by me and Harendra Saini) Recent event - Indie Comix Fest 13 May 2018, Noida/Delhi.
#comics #horror #india #mohitness #comicstheory #anthology
Special edition A3 Size
Labels:
Art,
Comics,
Experimental,
Histoy,
Horror,
India,
Life,
Mohit (Trendster),
Mohitness,
Published,
Story,
Update,
मोहित शर्मा ज़हन
Location:
Delhi, India
Sunday, June 17, 2012
Thursday, February 16, 2012
भीगी बैसाखी
Jallianwala Bagh Massacre (Amritsar, 13 April 1919)
बड़ा गहरा है तेरा कुआँ....
जो गुम हुई इसमे माँ की दुआ...
खुदगर्जी में तूने अपनी दीवारों को लाल कर डाला...
कितना ज़ालिम है तू ओ जलियांवाला...
खेलते बच्चों को किसने गुमसुम कर डाला,
कितना काला है वो गोरी चमड़ी वाला...
सुबह से खड़े थे वो तो तेरे जवाब सुनने के वास्ते,
शाम तक पट गए लाशो से संकरे रास्ते.
आयेंगे वो दिन उसको यकीन था,
दौड़ी चौखट तक...कोई नहीं था.
ऐसा तो न था मासूमो का विरोध,
जो तेरी 'महारानी' ने उन्हें तोहफे मे दिया बारूद.
कम पड़ रहे थे क्या भीगे जज़्बात,
क्यों पड़ने लगी ये बरसात?
पलके कहाँ झपकेंगी,
देखना है कितनी लम्बी होगी ये रात.
ज़ख़्मी बिछड़े अब कहाँ जायेंगे...
तेरे निजाम के कर्फ्यू मे अपनों से पहले लाशो तक गिद्ध, कुत्ते आयेंगे...
उसके मन मे था ये बैसाखी मेला लेकर आयेगी...
अब से वो अभागी कभी बैसाखी नहीं मनायेगी...
तेरी इबारत मे एक माँ ठगी गयी...
सच को दबाकर अपनी बात को तो साबित कर दिया सही...
अरे..रुक कर देख तेरी एक गोली किसी नन्हे से दिल को भेद गयी...
- Mohit Sharma (Trendy Baba)
बड़ा गहरा है तेरा कुआँ....
जो गुम हुई इसमे माँ की दुआ...
खुदगर्जी में तूने अपनी दीवारों को लाल कर डाला...
कितना ज़ालिम है तू ओ जलियांवाला...
खेलते बच्चों को किसने गुमसुम कर डाला,
कितना काला है वो गोरी चमड़ी वाला...
सुबह से खड़े थे वो तो तेरे जवाब सुनने के वास्ते,
शाम तक पट गए लाशो से संकरे रास्ते.
आयेंगे वो दिन उसको यकीन था,
दौड़ी चौखट तक...कोई नहीं था.
ऐसा तो न था मासूमो का विरोध,
जो तेरी 'महारानी' ने उन्हें तोहफे मे दिया बारूद.
कम पड़ रहे थे क्या भीगे जज़्बात,
क्यों पड़ने लगी ये बरसात?
पलके कहाँ झपकेंगी,
देखना है कितनी लम्बी होगी ये रात.
ज़ख़्मी बिछड़े अब कहाँ जायेंगे...
तेरे निजाम के कर्फ्यू मे अपनों से पहले लाशो तक गिद्ध, कुत्ते आयेंगे...
उसके मन मे था ये बैसाखी मेला लेकर आयेगी...
अब से वो अभागी कभी बैसाखी नहीं मनायेगी...
तेरी इबारत मे एक माँ ठगी गयी...
सच को दबाकर अपनी बात को तो साबित कर दिया सही...
अरे..रुक कर देख तेरी एक गोली किसी नन्हे से दिल को भेद गयी...
- Mohit Sharma (Trendy Baba)
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