Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन

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Saturday, December 23, 2017

जासूस सास (हास्य कहानी)


लक्ष्मी कुमारी स्वेटर बुनने से तेज़ गति से अपनी बहु पर विचार बुन रही थीं।  वैसे उनकी बहु शताक्षी ठीक थी....बल्कि जैसी कुलक्षणी, कलमुँही बहुएं टीवी और अख़बारों में दिखती हैं उनके सामने तो शताक्षी ठीक होने की पराकाष्ठा ही समझो। फिर भी लक्ष्मी को एक बात परेशान करती थी। केवल उन्हें ही नहीं, कॉलोनी की कुछ और सास भी इस मुद्दे पर चिंतित थीं। कई घरों की 25 से लेकर 40 साल की महिलाएं आपस में अक्सर झुंड में घंटों पता नहीं क्या बतियाती रहती थीं। बाहर से लगता कि मानो चुगलियों की कितने पहाड़ चढ़ रही हैं। बड़ा और सभी कोण से ढका घर होने के कारण अक्सर दर्जन भर स्त्रियां शताक्षी के घर पर डेरा जमाती। 

मोहल्ले की सासों से जब रहा नहीं गया और उनकी मिसमिसी का रौला-रप्पा हो गया तो सबने पैसे मिलाकर अच्छी क्वालिटी के माइक्रोफोन और कैमरे लक्ष्मी कुमारी के आँगन में लगवाये, जहाँ बहुओं की चुगलियों का गोरख धंधा चलता था। दो दिन बाद वीकेंड को बहुओं की मैराथन बैठक हुई। अगले दिन सत्संग का बहाना बनाकर वृद्ध जेम्स बांडनियाँ गुप्त अड्डे पर मिलीं। कॉलोनी की सासें अपनी साँसें थाम कर बहुओं की मीटिंग की फुटेज देखना शुरू करती हैं। 

"दीदी, कल छुटकी की वजह से छोटा भीम हार गया। मैं तो दूध उबलने रखने जा रही थी कि मीनू ने बताया कि कालिया को जीत कर टाइटल मिल गया। इतनी झुंझलाहट हुई कि मैं कच्चा दूध ही पी गयी और मीनू की अभ्यास पुस्तिका फाड़ी सो अलग..." 

"हाँ! इस वजह से कल पूरा दिन मेरा भी मूड ऑफ रहा। ऑफिस से लौटे पीकू के पापा पुच्ची करने को बढे तो ऐसी कोहनी मारी मैंने...नील पड़ गया उनके होंठों पर। हुँह! भला कालिया को जिताना कोई बात हुई?"

छोटा भीम पर गंभीर चर्चा के बीच शिवा कार्टून सीरीज की फैन शताक्षी बोली। 

"...पेड़ाराम ने अपनी पड़ोसन के चक्कर में शिवा का फूफा जो किडनैप करवाया उस से मेरा दिल बैठ गया सच्ची। अरे! आपने सुना...शक्तिमान को दोबारा शुरू कर रहे हैं।"

उसके बाद मोटू पतलू, माइटी राजू, गली गली सिम सिम, डोरेमॉन, शिनचैन पर शिद्दत से चर्चा हुई। इतना ही नहीं बीच-बीच में महिलाओं ने कार्टून सीरियल्स के मंगल गीत...टाइटल सांग भी गुनगुनाये। गृहणियों को जब फुर्सत मिलती थी तब टीवी के सामने बच्चे होते, जो कोई और चैनल चलने ही नहीं देते थे। कोई विकल्प ना होने के कारण थोड़े समय बाद कार्टून्स, एनिमेशन में बच्चों की तरह महिलाओं को भी मौज आने लगी और देखते ही देखते यह कार्टून क्रान्ति महिला मोर्चा बन गया। 

बहुओं की बुराई और गप्पों के लिए ब्रेड रोल, पकोड़े तल कर लायी एक सास निराशा में बोली। 

"भक..."

ये केवल एक 'भक' नहीं बल्कि 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया' वाली हार की स्वीकृति थी। गुप्त फुटेज देख रही सास मंडली के सारे अंदेशों का मुरब्बा बन चुका था। धूलधूसरित पहलवान की तरह सब अपने कार्टूनी सत्संग से घर लौट आयीं। 

समाप्त! भक!
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Art - Sebastien K.
#ज़हन