Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन

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Thursday, March 9, 2017

कुत्ते ने काट लिया! (हास्य कहानी) #ज़हन

दिलजला कुत्ता

कुत्ते के काटने और गोली लगने में तुलना की जा सकती है। जैसे कुत्ता काटकर निकल ले, उसके दाँतों और आपके शरीर का कोण सही ना बैठे या आप तुरंत छुड़ा लें, तो उसे गोली शरीर से छूकर निकलना कहा जा सकता है, फिर दूसरा होता है कि कुत्ता तसल्ली से शरीर के किसी हिस्से को हपक के काटे और कुछ सेकंड चिचोड़े भी तो इसे कहेंगे गोली लगना। अभी रुकिए! तीसरा गोलियों से छलनी होना नहीं सुना? या जो फिल्मों में विलेन बोलते हैं, "गोलियों से भून डालो इसे!" वो तब होता है जब कुत्ता पगला जाए और व्यक्ति को जगह-जगह काटे, मारने-पीटने पर भी न छोड़े और जान छुड़ानी भारी पड़ जाए। ये कहानी एक ऐसे ही पागल कुत्ते की है....प्यार में पागल कुत्ते की।

सच्चे प्यार की फ्रीक्वेंसी जन्मजन्मांतर तक सेट होती है। पिछले जन्म में ये कुत्ता जी सूर्य शर्मा नामक इंसान हुआ करते थे। सुन्दर, सुशील और दयावान, मतलब इतने गुणी की इनके गुणों की संख्या से लोग जलते थे। इन्हें अपने मोहल्ले की युवती सुलोचना पर क्रश था। कई महीनो तक शर्मा जी शर्माते-शर्माते, तरह-तरह के जतन करते आखिरकार अपना प्रेम अभिव्यक्त करने में सफल रहे और शुरू हुई एक इंटर-लाइफ लव स्टोरी! सूर्य और सुलोचना एक दूसरे को इतनी अच्छी तरह समझते थे कि चेहरे के भाव देख कर समझ जाते थे कि उनके प्रीतम के मन में धूम मच रही है या कुछ देर पहले खाये गोलगप्पे ज़्यादा तीखें हैं। 

प्रेमी जोड़े में बुद्धिमत्ता बहुत थी तो बिना किसी जानकार को भनक लगे किसी गुप्तचर की चपलता से दोनों लगभग रोज़ ही मिल लेते थे। सुलोचना की रूचि फैशन डिजाइनिंग में थी और वह एक प्रतिष्ठित यूरोपीय संस्थान में पढाई की स्कॉलरशिप का सपना देख रही थी। उस छात्रवृत्ति के लिए सुलोचना को फैशन डिप्लोमा की आवश्यकता थी जिसकी फीस लाखो में थी। सूर्य को जब यह बात पता चली तो उसने अपने सभी संसाधन सुलोचना के डिप्लोमा की तरफ केंद्रित किये। अपनी दूकान बेचकर उसने किसी तरह सुलोचना की फीस भरी। घर पर इन घटनाओं और हरकतों के लिए दोनों अब भी बहाने बना रहे थे। जैसे सुलोचना ने अपने घरवालो को बताया था कि उसे स्थानीय संस्थान द्वारा मिली छात्रवृति से उसकी कोई फीस नहीं लग रही है। भाग्य से डिप्लोमा हो जाने के बाद प्रतिभावान सुलोचना का चयन स्कालरशिप के लिए हो गया और वह फिनलैंड के प्रतिष्ठित फैशन संस्थान में पढ़ने चली गई। सूर्य को अपना हर बलिदान सार्थक लगा और वह आतुरता से सुलोचना के लौटने के दिन-हफ्ते-महीने गिनने लगा। 

लंबे इंतज़ार के बाद सुलोचना लौटी पर वही एक व्यक्ति से शादी करने के बाद। सूर्य का जैसे संसार उजड़ गया। कहाँ उसने आगे के एक-एक वर्ष की योजना बना रखी थी और कहाँ उसका अब बीत रहा हर क्षण कटीले पहाड़ चढ़ने जैसा था। सूर्य ने अपनी पुरानी प्रेयसी का सामना किया तो उखड़े मन से सुलोचना ने उस से कन्नी काट ली और कहा किशोरावस्था का प्यार असली प्यार नहीं होता। "यह ज्ञान की गंगा मेरी दूकान बिकने से पहले बहा देती कलमुँही।"

अब सूर्य को लगा कि इस मैटीरियलिस्टिक दुनिया में फिलोसॉफी और मोरल साइंस की किताबो वाले जीवन का कोई फायदा नहीं। उसने अपने व्यवहार के सभी गुणों को चुन-चुन कर अवगुण बनाया और इस भौतिक दुनिया से बदला लेने की ठानी। झूठ बोलना, छल करना, पैसा गबन करने से लेकर  छोटे पाप जैसे सोते हुए पिल्लो को लात मारना, पहले मीठा गिराकर चींटीयों का मेला लगाना और फिर उस स्थान पर खौलता हुआ पानी डालना या कड़े सोल वाले जूते पहनकर डांस करना, गरीबो के घर में कलह बढ़ाने के लिए मुफ्त में शराब बाँटना, बाजार में तरह-तरह की अफवाह फैलाना आदि। जब तक वह दिन में ऐसी कुछ हरकतें ना कर लेता उसके कलेजे को ठंडक नहीं मिलती थी। कुछ वर्षो बाद उसकी अकाल मृत्यु हो गयी और उसके खाते में लिखे हज़ारो-लाखो अपराधों के कारण उसने कुत्ते की योनि में जन्म लिया। भाग्य फिर उसे अपने पिछले जन्म की प्रेमिका के घर के बाहर ले आया। अब सुलोचना एक प्रौढ़ औरत, 6 साल के बच्चे की माँ थी। उसके घर के बाहर निरीह पिल्ले (सूर्य) की आवाज़ों से सुलोचना के बच्चे प्रणव का मन पिघल गया और वह अपने माता-पिता की अनुमति से उसे अपने घर ले आया। इस पिल्ले का नाम सूरज रखा गया। किसी कारणवश सूर्य (सूरज) में अब भी अपने पिछले जन्म की स्मृतियाँ प्रबल थी। उसे कुलोचना (जो वह सुलोचना को मन में बुलाता था) का धोखा, उसकी बातें, पेड़ की आड़ में ली गई पप्पियां तक याद थी। वह उस घर में रहना तो नहीं चाहता था पर सड़क के कुत्तो के बदहाल जीवन की अपेक्षा ऐसा पालतू जीवन बेहतर था। उसने देखा कैसे सुलोचना के बड़े हो रहे लड़के प्रणव की 3 गर्ल फ्रेंड्स हैं और सोचा ("बिलकुल माँ पे गया है नासपिटा"). सुलोचना का अपना भव्य बुटीक और एक स्थानीय ज़री कला के कपड़ो की दुकान थी। अपना व्यापार बढ़ाने और बड़े स्तर पर प्रचार के लिए उसे कुछ निवेशकों की आवश्यकता थी। उसके शहर में घूमने आ रहे कुछ विश्वप्रसिद्द फैशन डिज़ाइनर, व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल एक अच्छा अवसर था। उसे डर था कि उस से पहले कोई और प्रतिद्वन्दी बाज़ी ना मार ले जाए। आनन-फानन में उसने अपने घर के पर्दे, कालीन, गमले, नहाने की बाल्टी तक बदल दी। उसका पुराना आशिक कुत्ता सूरज ये ट्रेंड भांप चुका था। रात को उसने छुपकर कुलोचना और उसके पति पल्लव की बातें सुनी। 

"ऐसे कैसे सूरज की जगह क्यूट सा पग ले आयें। 3-4 साल से घर में है, प्रणव नाराज़ नहीं होगा?"

कुलोचना - "विदेशी मेहमानों के लिए घर का इतना सब बदलवाया है, अब उनके आगे देसी कुत्ते से अच्छा इम्प्रैशन नहीं जमेगा। परसो वो लोग आ रहे हैं, कल रात प्रणव के सोने के बाद, सूरज को कार से कहीं दूर छोड़ आएंगे।"

गुस्से मे कुंकारते सूरज ने गमले में ज़ोर से अपनी थूथन मारी और नया गमला चटक गया। दर्द तो हुआ पर उसे तसल्ली हुई की कुलक्षणी का ढाई सौ रुपये वाला  एक गमला तो चटकाया। अगली रात प्लान के अनुसार सूरज को घर से बाहर निकालने के लिए पल्लव, सुलोचना जब बालकनी से सटे डॉग हाउस पर पहुंचे तो सूरज वहाँ से नदारद था। पूरे घर में और आस-पास आधा घंटे ढूंढने के बाद भी जब उन्हें कुछ न मिला तो दोनों ने सुबह सूरज को देखने की बात सोची। सुबह भी सूरज कहीं नहीं दिखा। दोनों ने सोचा चलो अच्छा हुआ, सूरज अपने आप ही गायब हो गया और हमारे हाथो से पाप होने से बच गया। सुलोचना अपनी मासिक कमाई के आधे खर्च पर एक फैंसी पग कुत्ता ले आयी। अगले दिन सुलोचना के न्योते पर विदेशी प्रतिनिधिमंडल का आना तय हुआ। सभी बातें सुनियोजित चल रही थी, आखिर सुलोचना और पल्लव ने एक-एक बात का रिहर्सल कर रखा था। मेहमान घर में पधारे और उनके स्वागत सत्कार के बाद नाश्ता शुरू हुआ। इधर अपने मिशन के तहत गली के सभी कुत्तो के साथ सूरज पहले ही छुपकर घर की छत पर पहुँच चुका था। वो उस शाम घर से निकल कर पास की खाली ईमारत में छुप गया था। वैसे तो सड़क के आवारा कुत्ते पालतू कुत्तो से चिढ़ते हैं पर सूरज की दर्द, धोखे वाली प्रेम कहानी सुनकर सबका दिल पसीज गया और उन्होंने सूरज की मदद करने की शपथ ली। अपनी योजना पर रिहर्सल सूरज एंड पार्टी ने भी किया था। मेहमान अभी बैठे ही थे कि अचानक उनपर छत से उतरे  दर्जनों कुत्तो का सरप्राइज अटैक हुआ। सूरज अपनी कुत्ती भाषा में अपनी टुकड़ी का मार्गनिर्देशन करने लगा जो वहाँ मौजूद इंसानो को केवल "भौ भौ", "वुफ़-वुफ़" सुनाई दे रही थी। 

सूरज (कुत्ती भाषा में) - "साथियों दबोच लो सबको, रास्ते ब्लॉक कर दो! आज इन सबका ऐसा अतिथि देवो भवः करके भेजना है कि आगे भारत का नाम सुनके आत्मा खनक जाए इन लोगो की। अपनी-अपनी थूथन रगड़ दो इन सबके मुँह, शरीरों पर... लिसलिसा दो एक-एक को! शरीद के डेढ़ मीटर दूर से 'हाउ क्यूट', 'लवली कहके' उठाते हैं और फिर 4 बार हाथ धोते हैं। जरमोफोब कहीं के! दिखाओ इन्हें भारतीय कीटाणुओं की देशभक्ति। लोटा दो ज़मीन पे चिचोड़-चिचोड़ के! चाहे कोई हुश करे या डंडा मारे पर दन्त ऐसे गड़ाने हैं कि सबकी खाल में परमानेंट हलंत के निशान पड़ जाए। नेस्तोनाबूद कर दो ये घर...सोफे फाड़ दो, फर्नीचर तोड़ दो, राशन नाली में बहा दो, बस वो बाद के लिए चॉकलेट केक सरका लेना कोने में और रुक तू कुलोचना की बच्ची....रात से मैंने सू-सू रोक रखा है ताकि तेरा ढाई लाख का नीता लुल्ला डिजाईन लहंगा ख़राब कर सकूँ। ना-ना कुल्टा मुझे पुचकारने या दूध में भीगी ब्रेड जैसे लोलू लालच देने की कोशिश मत कर सनम बेवफा क्योकि जब प्यार की आग का बदला दिल में धधकता हैं ना जान-ए-तमन्ना तो ये संसार भुला देता है। बाल इतने लंबे  कैसे हो गए तेरे 2 दिनों में? ओह! नकली एक्सटेंशन बालों वाला जूड़ा...."

तभी किसी कुत्ते ने गलती से रेडियो चला दिया जिसपर लक्खा सिंह की भक्ति भेंटे चल रहे थे। 

सूरज - "आहा! किसने घड़ा? किसने घड़ा निराला माँ का रंगला चूड़ा....हो रंगला चूड़ा....मैंने नोच खाया कुलोचना का नकली एक्सटेंशन वाला जूड़ा हो नकली जूड़ा....

....और ये बोटॉक्स के इंजेक्शन लगाकर चेहरा बड़ा टाइट कर लिया है इसपर एक काटी तो बनती है। हाँ...गिड़गिड़ा, रो, माफ़ी मांग...मैं भी बहुत तड़पा हूँ कुत्ती! वो भी 2 जन्म। कहाँ है तेरा फिरंगी पग, देख तू उसकी तस्करी नाले पार वाली कॉलोनी मे करवाता हूँ और वो पल्लव वजन की वजह से लंगड़ा के चलता है ना, उसके दूसरे पैर में काट लेता हूँ फिर बैलेंस चलेगा।"

सिर पर कफ़न बाँध कर आये कुत्ते अपनी मिसमिसाहट दूर कर, आखिरकार सूरज के कहने पर वहाँ से दूसरे मोहल्लों के लिए निकल गए। सूरज नगर पालिका की वैन आने तक मोर्चे पर डटकर आतंक मचाता रहा। उसके बंदी बनाये जाने के बाद सुलोचना के घर का दृश्य किसी भूकंप के बाद जैसा था और वहाँ उपस्थित सभी पीड़ित किसी बम ब्लास्ट में जीवित बचे लोगो से लग रहे थे। नाक से अधिक मुँह से सांस लेते विदेशी मेहमान तुरंत भारत की सीमा से बाहर निकलने की बुकिंग करने लगे। सदमे में गमलो की मिट्टी और कुत्तो की लार का उबटन लगाए फ्रिज के नीचे दबी सुलोचना सोच रही थी कि आखिर उसे किस जन्म के पापो की सज़ा मिल रही है। 

समाप्त!

#मोहित_शर्मा_ज़हन #Mohitness

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Sunday, July 20, 2014

Monologue Video - Bhukamp Peedit Ulkapind

Bhukamp Peedit Ulkapind (Prince Ayush & Mohit Trendster)

Youtube Video - Watch Bhukamp Peedit Ulkapind


*We apologize for average video and voice over quality.
Bhukamp peedit Ulkapind
  1. Nahi! Mai Bhukamp peedit nahi hun. Shehar mey Bhukamp aaya hai iska matlab ye to nahi ki us din kisi ke ghar antriksh se Ulkapind nahi gir sakti?” Haso mat!
  1. Arre koi meri baat kyu nahi maan raha? Sab hase hi jaa rahe hai. Mere ghar mey Ulkapind gira hai.
  1. Dekho…wait..mai lambi saans leta hun…shuru se batata hun.
  1. Humara domanjila makaan hai. Upar kiraydaar rehte hai aur neeche meri family. Mere parivaar mey mere mummy-papa hai jo Gaon….mera matlab Goa vacation par gaye hai. Kirayedaar young couple hai.
  1. Subah zor se ek dhamake ki aawaz huyi jaise sabse purani waali Mahabharat mey 2 teer takrate the to jo aawaz hoti thi waisi waali aawaz….aur maine mehsoos kiya ki meri baahon mey koi hai. Maine socha roz ki tarah sapna hoga aur upar waali Bhabhi hongi jab aankh khulengi to Kaamwaali ki jhaadu se udi dhool se Good Morning hogi.
  1. Par ek to dhamaka phir aaj sapne se ulat Bhabhi bahut kulmula rahi thi baahon mey, aankhen khuli to dekha meri baahon mey Bhabhi ki jagah Bhaiya chhatpate hue keh rahe the ki“Bhagwan k liye mujhe jaane de, Darinde!”
  1. Upar roof mey ched ho gaya tha jis se aasmaan dikhai de raha tha. Kamre aur Hall ko ghere hue ek badi chattan type padi thi jisme se dhuan nikal raha tha. Bhabhi aur Kaamwaali ka kuch ata-pata nahi tha kyoki Ulkapind seedhe unpar gira tha.
  1. Tabhi gande kapdo mey ek sundar si yuvati mere paas aayi aur boli….
“Bhaiya! Pair hatao, poochha lagana hai.”
  1. Ulkapind k jaadui asar se Kaamwaali Bai khoobsurat ho gayi thi. Tabhi nighty pehne hue Lasith Malinga hamare saamne aa gaya. To mai aur Bhaiya uske saath selfies aur autograph lene ki zid karne lage….Malinga Bola…
“Arre Murakh…mai teri bhabhi hun…”
Ulka k Jaadu se Bhabhi ki shakl Malinga jaisi lag rahi thi.
The End!

Monday, December 23, 2013

Wednesday, October 24, 2012

Pagli (Fiction Comics) Promotional Writeups, Dialogues

Working with the Fiction Comics Team on the promotion of their upcoming Horror series Pagli. More ads coming soon....


Ad # 1

                            "छुप्पन छुप्पाई खेलें छुप्पन छुप्पाई....
                             टेडी मेरे भाई खेलें...छुप्पन छुप्पाई...

                             तम तीनो ने जो एक लड़के पर गाडी चढ़ाई..
                             सोचा तस्सल्ली मे दुनिया न देख पाई...
                             पगली पीछे आई...देखो पगली पीछे आई...
                              छुप्पन छुप्पाई खेलें छुप्पन छुप्पाई...."

Ad # 2

"गुस्सा नहीं करते, सॉरी बाबू....आने मे देर हो गयी और तुम्हारी सौतेली मम्मा जी तुमको मार दिया...रास्ते मे कुछ अंकल लोग मिल गये थे, उन्होंने ना देरी करवा दी. गंदे अंकल कहीं के! अरे सॉरी बोल रहीं हूँ ना..दूकान वाली बूढी अम्मा ने बोला है की बारिश मे भीगने से सर्दी लग जाती है...अब उठ भी जाओ....उठक-बैठक लगाऊ क्या? तुम्हारी गंदी मम्मी को को भी पनिशमेंट दे दूंगी प्रोमिस...मुर्गा..सॉरी..सॉरी मुर्गी बना दूंगी..ही ही ही....ओके मुझसे कट्टी है मान लिया पर टेडी से तो हैण्ड शेक कर लो...उस से बात करो लो...पगली दीदी की बात मान लो प्लीज्...."