Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन

Saturday, September 19, 2015

Bageshwari Magazine (Sep-Oct 2015) Issue


I am loving the format and content of this magazine.  Continuing my association with Yoguru Technologies, this is Bageshwari's fifth issue with my works. Read my latest laghukathayen exclusively....Bageshwari (September - October 2015)

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba

Saturday, September 5, 2015

Parikrama Comic


Parikrama, is a comic based on fanfic work (part of advert series) written by yours truly in 2007. Illustrated by Yash Atharv Thakur and Colored by Inderjeet Bhanoo. Exclusively available - desi-american.com and sister websites, forums. Cover by Saket Kumar

A page from Parikrama

#parikrama #mohitness #rajcomics #comics #indiancomics #freelance_talents #yashatharv #inderjeet #mohit_trendster

Friday, August 14, 2015

लालची मौत :: Deadly Deal, Horror Comic (Freelance Talents)


Deadly Deal (Laalchi Maut) - Horror Comic by Comic Fan Fest in association with Freelance Talents. Author - Mohit Trendster, Illustrator - Kuldeep Babbar, Coloring - Harendra Saini, Calligraphy - Youdhveer Singh

Freelance Talents और Comic Fan Fest पेश करते है लालची मौत (हॉरर कॉमिक्स), कल स्वतंत्रता दिवस से रोज़ाना इस पेज पर।

P.S. Delayed Release (Story - 2006, Artwork - 2011)

Thursday, August 13, 2015

Guest appearance in Ashes (RSP)


Guest appearance in Ashes -Adish Origins (Red Streak Publications) after winning "Fire for Fear" writing contest (with co-winner Utkarsh Sikriwal). 

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Nyctophobia Struggle....

My entry for Red Streak Publications Fire for Fear Contest. 

                                                             Red Streak Publications
Entry #4
from meerut

डर हर किसी के जीवन का अंग है, बस उसके कारक अलग-अलग हो सकते है पर डर का अनुभवकभी ना कभी हम सभी करते है। अपने अनुभव से मैंने यह सीखा है कि डर को टाल कर हम उसे अपनी आदत में आने का और बड़ा होने का अवसर दे देते है जबकि उसका सामना कर उसको हराना उतना मुश्किल नहीं जितना हम समझते है। जीत कभी तुरंत मिल जाती है और कभी धीरे-धीरे भय को मारा जाता है।

मेरा डर अँधेरे से था। वजह तो पता नहीं पर बस यही एक बात थी जिस से मुझे बेचैनी होती थी। बचपन तो मम्मी-पापा के बीच में राजा की तरह सोकर कट गया पर टीनएजर होने पर बड़े भैया और दीदी के अलग शहरों में जाने के बाद अपना कमरा मिला तो रात में लाइट ऑफ करना मेरे लिए एक संघर्ष बन गया। जैसा मैंने कहा कि इसका कारण मुझे याद नहीं पर अवचेतन मन में शायद कोई बचपन में सुनी कहानी घर कर गयी थी या मैंने खुद ही कोई अनजान अनुभव गढ़ लिया था। धीरे-धीरे घरवालो ने इस आदत के लिए टोकना शुरू किया पर हमेशा मेरे पास कुछ ना कुछ बहाने रहते थे लाइट जली छोड़ने के। शायद समय के साथ मेरे पिता जी जान चुके थे पर मुझे बुरा ना लगे इसलिए उन्होंने कभी ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया इस बात पर मेरे बड़े होने के बाद भी।

यह भय केवल अंधकार का नहीं था बल्कि उसमे गढ़ी अज्ञात बातों, काल्पनिक भूत-प्रेतों, जीवों का भी भय था। जब भी लाइट ऑफ कर सोने की कोशिश करता तो ऐसा लगता जैसे कोई कमरे में बैठा मुझे देख रहा है। उस ओर पीठ कर सोने को होता तो लगता कि वह और पास आ गया है। वैसे अंधेरे में कहीं बाहर टहलने में, किसी अँधेरी जगह जाने में यह डर शायद इसलिए नहीं लगता था क्योकि मन को गाड़ियों-लोगो कि आवाज़ों से यह तस्सली रहती थी कि आस-पास कोई है और कुछ अनहोनी होने पर मैं दौड़ कर उनके पास पहुँच सकता हूँ। पर रात को ना लोगो कि आवाज़े रहती और ना ही मैं परिवार के सदस्यों को परेशान करना चाहता था इसलिए चाहे-अनचाहे मुझे अपने कमरे में मुझे घूरते अनजान जीवों के साथ रहना पड़ता।

इन्वर्टर आम होने के ज़माने से पहले लाइट जाने पर रात में अगर मेरी नींद खुलती तो 15-20 मिनट्स तक करवटें बदलने तक अगर लाइट वापस नहीं आती तो मुझे बरामदे में टहलना पड़ता जहाँ दूर की स्ट्रीट लाइट्स से, घरों से थोड़ी बहुत रौशनी रहती थी। वैसे तो टोर्च भी थी पर घुप्प अँधेरे में टोर्च की रौशनी घरवालो का ध्यान खींच सकती थी और उसे किसी तरह ढकने या एंगल बदलने पर फायदा ना होता। पूरी कोशिश रहती थी की मेरे परिवार पर यह बात ज़ाहिर ना हो इसलिए रात में कम से कम हरकते करता था। एक बार तो सरकारी मकान में अपने कमरे कि खिड़की के कोने में अच्छा-खासा छेद कर दिया जिस से लाइट जाने पर भी दूर अलग फेज़ की स्ट्रीट लाइट की बीम से कमरे में थोड़ा उजाला रहे।

समय के साथ चीज़ें बदली पर यह आदत जैसे मेरे रूटीन में आ गयी। अगर मैं कहीं किसी के यहाँ कुछ दिनों के लिए बाहर जाता या किसी फंक्शन आदि वजह से कोई मेरे कमरे में सोता तब मुझे ऐसा कोई डर नहीं लगता था। पर यह बात 25 साल के हो जाने के बाद भी जारी रहने पर मुझे परेशान करने लगी। जब भी मैं लाइट बंद कर सोने की कोशिश करता तो कुछ ही देर में इतनी बेचैनी हो जाती कि उठकर स्विच ऑन करना पड़ता। अब खुद पर गुस्सा बढ़ने लगा था। पहले तो 6 फ़ीट से ऊपर अपने शरीर को देख कर लगता था कि ऐसा क्यों करता हूँ मैं, फ़िर इस बात को बचपन से अब तक घसीटते जाने पर। एक यह सोचने पर हँसी और रोष दोनों आते थे कि बचपन से अब तक मैं कितनी लाइट वेस्ट कर चुका हूँ इस डर के चक्कर में।

समस्या पर गौर करने पर मैंने पाया कि अब तक मैं सिर्फ इसको अनदेखा कर रहा था, टालते हुए बच रहा था पर असल में मैंने कभी इसका सामना तो किया ही नहीं। सबसे पहले तो मैंने पाया की मेरा शरीर और मेरी आँखें रात में रौशनी की इतनी अभ्यस्त हो चुकी थी कि उजाला कम या बंद होने पर अपने आप मेरी नींद टूट जाती थी, शायद तभी कहते है कि बहुत लम्बे समय तक बुरी आदत के साथ रहने पर उस से पीछा छुड़ाना लगभग नामुमकिन सा हो जाता है। फिर मैंने अपने कमरे में रात के लिए अलग से ज़ीरो वॉट का बल्ब लगाया और कुछ हफ्ते उसमे सोया। जब मुझे कुछ अंतर महसूस हुआ तो समय था डर से सीधे उसके इलाके में युद्ध करने का। मैंने एक रात वह बल्ब भी ऑफ कर दिया पर पूरी रात सो नहीं पाया, पसीने से लथपथ बेचैनी का यह सिलसिला कुछ दिनों तक चला। फिर मैंने ध्यान बटाऊ टैक्टिक्स सोचे जैसे सोने से पहले खुद को अलग-अलग विचारों में डुबा देना, एक्सरसाइज से बहुत थका लेना, भगवान जी का स्मरण करते रहना, म्यूजिक सुनना आदि जिस से फायदा हुआ पर लगा कि यह भी भय को टालना हुआ, उसका सामना करने के बजाए।

अब मैंने बिना सहारे के सीधा मुकाबला करने की ठानी। मैं कमरे में हर उस तरफ उन काल्पनिक आँखों में देखता रहता जब तक मुझे नींद नहीं आती। अंतर लग रहा था, मैं बेहतर महसूस कर रहा था। कुछ दिन बाद अपने रूटीन में मैंने बिस्तर से तुरंत उठ कर कमरे के उन कोनो, जगहों पर जाकर घूरना शुरू कर दिया जहाँ मुझे लगता कोई मुझे बैठा/खड़ा घूर रहा है। इस बात कि घूरने वाले/वाली को शायद आदत नहीं थी, अब मैं भी अंधेरे के उन काल्पनिक लोगो को वैसे ही परेशान कर रहा था जैसे होश संभालने के बाद से अब तक उन्होंने मेरी नींद हराम कि थी (और मेरे पापा का बिजली का बिल बढ़वाया था)। आखिरकार मैंने इस डर को खुद से अलग कर लिया था और जैसे एक भ्रम को राख कर मन से एक भारी बोझ कम कर लिया। मैं चैन से सोने के लिए अब उजाले पर निर्भर नहीं। अब कभी कभी वह घूरने वाला कमरे मे आता है तो उस तरफ मुस्कुरा कर आराम से सो जाता हूँ।

Friday, July 31, 2015

Mohit Trendy Baba July 2015 #updates


*) - Freelance Talents Championship 2015-16 #ftc1516 Announcement


*) - Updated my photography blog Mohit-O-Graphy!

*) - ICF Annual Poll (Multiple Communities, Groups and Discussion Boards, Winner - Campfire Graphic Novels)


*) - ...had fun judging inaugural Comics Theory Contest. Congratulations to all the winners! ‪#‎comicstheory‬ ‪#‎contest‬ ‪#‎mohitness‬ ‪#‎mohit_trendster‬‪#‎freelance_talents‬


*) - Bageshwari Magazine (July 2015 Issue), Roles - Sub-editor, Co-judge of Laghu Katha Contest with Yogesh Amana ji and Author of 2 short stories.

- #mohitness #mohit_trendster #freelance_talents

Tuesday, July 28, 2015

Initiative - "India-Archives : भारतीय अभिलेखागार"


India-Archives Community के 2 प्रमुख उद्देश्य है - भारतवर्ष से जुडी विभिन्न बातों और गौरवशाली इतिहास का एक विस्तृत, सटीक डेटाबेस बनाते हुए उसका प्रचार-प्रसार करना। साथ ही भारतीय इतिहास के नाम पर प्रचलित भ्रमित करने वाली बातों को चिन्हित करते हुए देश और दुनिया को तथ्यों और बनावटी बातों का फर्क बताना। मुझे आशा है कि समय के साथ यह प्रयास और बेहतर रूप लेगा। 


Official Community FB Page -

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Twitter, Tumblr and Youtube updates soon.

#mohit_trendster

Monday, June 29, 2015

मोहित शर्मा (ज़हन) June 2015 #Updates


*) - Bageshwari June (Wrote 2 Articles), also judging "Laghu Katha Contest" for July 2015 issue.


*) - Randomiya continues....(snail's pace)


*) - Judging one of its kind  "Comics Theory (Research Anthology)" Contest with Mr. Anurag Kumar Singh.


*) - Another act by Ayush Jha on my concept, script - "Kingmaker Khameleon". 

*) - You can read my short stories, articles, reviews and random rants here (recently updated these 4 blogs) - 

Trendy Baba Mafia421 Brand Beedi FederationMohit Sharma (Trendster/Trendy Baba) Online Archives


*) - Pending short comics (Deadly Deal, Desh Maange Mujhe, Parikrama etc) calligraphy begins.....

Tuesday, May 19, 2015

Video - Mr. Writer (Jholachhap Talent)

Mr. Writer (Jholachhap Talent), short film.

Actor, Director: Mithilesh Gupta
Camera: Siddharth Gupta, Himmatman Singh
Story, Script - Mohit Trendster
Banner: You & Me Films


Youtube Link -

Friday, May 1, 2015