Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन
- Mohit Sharma (Trendy Baba / Trendster)

Wednesday, May 25, 2011

....84 की टीस (Pogrom 84)

1984 के सिख विरोधी दंगे या उनका सामुदायिक संहार श्रीमती इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद शुरू हुआ भारत का वो काला अध्याय है जिसने हजारो लोगो की बलि ली और कई ज़िंदगियाँ जीते जी बर्बाद हुयी.. लाखो बेघर हुए... और उसके बाद...विडंबना यह है की इतनी बड़ी घटना के बाद कुछ नहीं हुआ. 11 कमीशन बैठाकर औपचारिकता निभाई गयी....हर साल मातम मनाया गया. इस अध्याय  से जुडी बातों और तथ्यों को इस कदर मिटा दिया गया और धुन्दला कर दिया गया की आज की पीढ़ी को यह दिखना बंद हो गया की हमारे देश मे ऐसा भी कुछ हुआ था. 

यह कविता समर्पित है उन सभी मासूम को और आधारित है आँखों देखे वर्णन और दृश्यों पर!

उस बेरहम वक़्त को झेलती एक जवान सिख लड़की की कहानी......






....84 की टीस (Pogrom 84)

वीरे पग ना पहनियो,
के किस्मत फिर जायेगी. 
बरसो टली क़यामत,
आज बस यूँ आयेगी....

आँखों देखा मंज़र क्यों ये दिल ना माने?
खालिस्तानी बोली भिंदरवाले जाने.
आँगन लाल है मेरा, रो-रो लाल है आँखें.

सुबह जिनके पैरो पर अपने हाथ लगाये,
शाम को चिथड़ो मे से हाथ बस पैर वो आये.

अपनी फसले जलाई, 
दीवारे घर की ढहाई.
फिर भी मिली ना ठंडक...
तो पग विच आग लगाई.

सीने पर जो वज़न लदा ऐसे,
सांस लूँ अब बता मै कैसे? 
देखे कोई मुझे आसमां से,
खोल रखा है घर के दरो को, 
आओ-आओ मुझे मार डालो.

गूँजते नारों ने बताया,
जिसमे मैंने होश संभाला,
हर सावन का झूला डाला,
मेरा देश है वो पराया!

रंगीन टी.वी. जो तू प्यार से लाया, 
लाल सड़क पर उसमे तुझे मरता दिखाया. 
ढकने सावन को पतझड़ आया,
अब लंगर नहीं लगाता गली का गुरुद्वारा. 

भारी और नम हवा कुछ बताये....
खून की गंध अपनों की लाये. 
कहते किसको क़यामत पता क्या?
लुट गया मेरा जो भी जहाँ था. 

दौड़ी बी जी मेरी चौक तक यूँ, 
कितनी चीखें सुनी क्या बताऊँ? 
हार कर कानो पर हाथ आये, 
तब भी ज़ेहन से चीखें ना जाये. 

राशन-वोटर कार्ड कभी अपने काम ना आये,
सरकारी दफ्तरों से उनकी लिस्ट वो लाये. 
सुर्ख निशान घरो पे हमारे बनाये, 
सोचती हूँ कहाँ है उसका कलेजा?
लाशों से जो वो लिस्ट मिलाये. 

जीते जी मैंने इज्ज़त बचा ली,
खुद ही अपनी नस काट डाली.
बेरहम मौत तब भी ना आये,
दर्द अब तो सहा ना जाये.

घर मे रहकर याद घरवालो की सताये,
पहुंची हूँ मै घिसट कर छत तक....और कुदूँगी...
....क्यों?
...क्योकि...ऊपर देख! मेरे बी जी-वीरा मुझे बुलाये!


The End!





Monday, May 16, 2011

"क्लेवरता" (Cleverta) मतलब चालाकी!





"गर्मियों की छुट्टियाँ पड़ी है इस बार ख़ूब सारे दोस्त बनाऊंगा. पापा की जॉब ऐसी है की हर एक-दो साल मे उनका एक शहर से दूसरे शहर ट्रांसफर हो जाता है....कोई पक्का दोस्त बनता ही नहीं जैसे पिक्चरो और सिरियलो मे दिखाते है. 


छुट्टी पड़ने से पहले किसी क्लासमेट का घर नहीं पूछा....अब मेरी सोशल स्टडीज़ की क्लास वर्क कॉपी और व्याकरण की अभ्यास पुस्तिका खो गयी है. अब पता नहीं कैसे काम पूरा होगा. पहले दिन ही टेंशन आ गयी. पापा ने भी इतने दूर के स्कूल मे एडमिशन दिलवाया की कोई क्लासफेलो पास मे रहता भी नहीं. तेरे भैया कभी राजा की मंडी की तरफ जाए तो बताइयो वहाँ मेरे स्कूल वाले दोस्त के पापा की शॉप है.

आज पहला दिन है छुट्टियों का और मामा जी आ रहे है. वैसे जब भी मेहमान, रिश्तेदार आते है मुझे बड़ा मज़ा आता है कुछ रिश्तेदारों को छोड़ कर, सब पैसे दे ही देते है. जो ऐसे ही कुछ देर के काम से आते है उनके लिए ख़ास नाश्ता मँगाया और बनाया जाता है. समोसे, टिक्की, रसगुल्ले, बर्फी, क्रीम रोल, पेस्ट्री, पेटिज़.....हाय! बताने मे ही मुँह मे पानी आ गया. ऊपर से जो बिस्कुट-नमकीन-केक के पेकिट्स खोलने की घर वालो की तरफ से मुझे मनाही होती है वो भी मम्मी अपने आप आये हुए अतिथियों के लिए परोस देती है. पर रसोई से ड्राइंग रूम तक आने मे ही मै दो-चार बिस्कुट-केक, आदि  मुँह मे रख ही लेता हूँ फिर जल्दी से बिना कुछ बोले भाग आता हूँ....कई बार तो नमस्ते करने के लिए मुँह मे भरा सामान ख़त्म करके लौटना पड़ता है. एक बार उनके सामने नाश्ता रखने के बाद मै उनके जाने का इंतज़ार करने लगता हूँ. अब जो अपरिचित या कम जान पहचान वाले मेहमान होते है वो शर्म के मारे कम खाते है. उनके जाने के बाद पता चलता है की मँगाए 6 समोसे थे खाए गए सिर्फ 3 ....उसपर भी मै जल्दी नहीं करता, शांत बच्चा बना रहता हूँ. मम्मी-पापा खुद बुलाते है की बेटा ये समोसे-केक, आदि बच रहा है खा ले.....और फिर मै आराम से एक राजा की तरह सब ग्रहण करता हूँ. 

जो रिश्तेदार घर मे मिलने और कुछ दिन रुकने के प्लान से आते है उनके लिए अलग बर्ताव करना पड़ता है. अपनी किताबो की अलमारी लगानी पड़ती है, हर चीज़ सही जगह पर रखनी पड़ती है, जल्दी सोना और जल्दी  उठना पड़ता है ताकि आये हुए मेहमान पर अच्छा असर पड़े....ये सब करने से, बाद मे मम्मी-पापा की शाबाशी और कुछ बातों मे छुट तक मिल जाती है. मेहमानों की मदद करो, उन्हें बाज़ार घुमाने ले जाओ तो मुझे भी कुछ एक्स्ट्रा खाने की चीज़ या कपडे दिलवा देते है वो. एक बड़ी ज़रूरी बात अतिथियों के पैर रोज़ छुओ और नमस्ते, गुड मोर्निंग जो आपके यहाँ चलता हो वो भी बराबर करते रहो.....अच्छा बाई चांस भूल भी जाओ तो उनके जाते वक़्त तो ज़रूर उनके पैर बड़ी श्रद्धा से छुओ क्योकि तभी तो उन्हें हज़ार-पाँच सौ का नोट देना याद रहता है. वैसे अभी तो मेरे कंजक वाले पैसे चल रहे है....तब इतनी कन्याओ मे मै अकेला लांगुरिया था, इतने घरो मे जीमे हम लोग....किसी घर से हर बच्चे ने 10 रुपये से कम नहीं लिए. अच्छा रिंकू! कल बादाम मिल्क पिया था, आज भी मन कर रहा है...मै जा रहा हूँ....मेरी साईकल मे हवा कम है नहीं तो तुझे भी ले जाता. याद रखियो जो बातें मैंने बताई है तुझे....अच्छा, बाय! सुना तूने विडियो गेम लिया...आइयों...हाँ, घर लेकर आइयो!  चल फिर....बाय!" 



Thursday, May 5, 2011

Table Hockey (School Version)





Table Hockey {Also Known As Bench Hockey} (School Version) 

One of the few Underground Extra Curricular Activities allowed in RLB, School Invention, Indoor Game.


Mini version of Field Hockey to cure the boredom in School. Invention, Research & Development by Dr. Mohit Sharma (Trendster), Yes I know credits should be posted after the writeup. 

Hockey Stick = Pen/Pencil,

Goal Post = Pencil Box,

Ball = Eraser/Sharpener,

Duration : Depends on Recess, Free Period(s) or time you get in between the classes.

Number of Player : 2 to 6 (Max. 6 is our record Rani Laxmi Bai Memorial Senior Secondary School, Vikas Nagar, Lucknow...but you can have more players if you borrow a bench from local zoo's main attraction....Hippo).

*) - 2 Pencil Boxes are placed on the edges of bench in horizontal position. Ball hitting anywhere on the box is goal.

*) - You can dribble or hit the ball from anywhere on the bench but goal is only valid when the shot is taken after the "centre line" (marked by permanent marker) dividing bench in 2 equal halves.

*) - You can only tackle with Hockey sticks. No hand to ball contact, (...this sounds double meaning or Am I over-conscious? What...Both?) If a players hand touches the ball while tackling, hitting, dribbling then the play is stopped, ball is placed at the point of impact (where Hand Penalty Occurred) on the bench. Both players get chance to possess the ball after the count of 3....it's luck whoever hits first after the count.

*) - If ball goes out of play (bench) [For example : You unintentionally hit a shot right towards your crush's seat...she ignores it & manages her pony as usual...huh! or sharpener imitates bullet & fixes itself to some untraceable location. Next day, you see it in a Pencil Box of a class fellow but have no courage to ask him/her about that sharpener.] Then the person who made last impact on the ball loses the possession of ball & another player gets chance to hit or dribble the ball from the point (side of bench) where ball left the bench or flied/dropped from the bench..worst part is the dust, even moisture (sometimes dirty) the ball gathers within the few seconds.....from when it left the play to when it is recovered from varied locations with a common backdrop of shoes-legs-dust & paper balls.

*) - You can only drag your Hockey Stick but can never "fly", "jump" (using your hand) to get advantage.

*) - If number of goals scored by teams are equal & time is less...[For Example : A teacher unexpectedly takes an extra class in a free period...I mean come on! man you are getting less than 500 Rupees per day....so, why are you working so hard? Or is this your frustration on school management...but we are students..jeez...] Then provision of 5 penalty strokes taken by each team from the "Quarter Line" (1/4 of the Bench length) marked not as dark as "Centre Line" as it is not used that much. 

Author notes :


*) - Facebook Page of Table/Bench Hockey -

http://www.facebook.com/pages/Table-Hockey-School-Version/214773321884665?ref=ts

*) - Hockey -

Hockey is a family of sports in which two teams play against each other by trying to maneuver a ball or a puck into the opponent's goal using a hockey stick. Different forms of hockey are Air Hockey, Underwater Hockey, Box Hockey, etc. More info.....

http://en.wikipedia.org/wiki/Hockey

*) - Last played this Game 5 Years ago.