Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन

Wednesday, April 11, 2018

उल्लास की आवाज़ (कहानी) #ज़हन

Artwork - Igor Vitkovskiy

जीव विज्ञानी डॉक्टर कोटल और उनके नेतृत्व में कुछ अनुसंधानकर्ताओं का दल प्रशांत महासागर स्थित एक दुर्गम द्वीपसमूह पर कई महीनों से टिका हुआ था। उनका उद्देश्य वहाँ रहने वाले कबीलों में बेहतर जीवन के लिए जागरूकता फैलाना था। स्थानीय धर्म सूमा के रीती-रिवाज़ों में हज़ारों कबीलेवासी अपनी सेहत और जान-माल से खिलवाड़ करते रहते थे। इतने कठिन और अजीब नियमों वाले सूमा धर्म में जागरूकता या बदलाव के लिए कोई स्थान नहीं था। अलग-अलग तरीकों से कबीले वालों को समझाना नाकाम हो रहा था। वीडियो व ऑडियो संदेश, कबीलों के पास खाद्य सामग्री या दवाई गिराना, रिमोट संचालित रोबॉट से संदेश आदि काम जंगलियों को जागरूक करने के बजाय भ्रमित कर रहे थे।

जब हर प्रयास निरर्थक लगने लगा तो डॉक्टर कोटल ने स्वयं जंगलियों के बीच जाकर उन्हें समझाने का फैसला किया। इस जोखिम भरे विचार पर दल के बाकी सदस्य पीछे हट गये। किसी तरह डॉक्टर केवल अनुवादक को अपने साथ रहने के लिए समझा पाये। बिना सुरक्षा के जंगली सीमा में घुसते ही दोनों को बंदी बना लिया गया। कुछ कबीलों की संयुक्त सभा में डॉक्टर और अनुवादक को एक खंबे से बाँध कर उनकी मंशा और पिछले कामों के बारे में पूछा गया। 

डॉक्टर ने अपनी तरफ से भरसक कोशिश की, और अपनी बात इस तरह ख़त्म की - "....हम आपके दुश्मन नहीं हैं। बाहर की उन्नत दुनिया में यहाँ फैले कई रोगों के इलाज और परेशानियों के हल हैं। एक बार हमें मौका देकर देखिए।"

अपनी जान के लिए कांपते और डॉक्टर को कोसते अनुवादक ने तेज़ी से कोटल की बात को जंगलियों की भाषा में दोहराया। 


जवाब में कबीलों के वरिष्ठ सदस्य ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। उन्होंने अनुवादक को बताया की सूमा धर्म सबसे उन्नत है और बाकी बातें व्यर्थ हैं। डॉक्टर कोटल को सूमा के ईश्वर ने उन सबकी परीक्षा लेने के लिए भेजा है।

अचानक अंतरिक्ष से गिरा एक विशालकाय पत्थर डॉक्टर कोटल और उनके अनुवादक पर बरसा और दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गयी। कोई बड़ी उल्का पृथ्वी का वायुमंडल पार करते हुए बड़े टुकड़ो में उस द्वीपसमूह पर बरसी थी। 

इस घटना में कोई जंगली नहीं मरा। उन सबका विश्वास पक्का हुआ कि उनके धर्म से ना डिगने के कारण वो ज़िंदा रहे जबकि बाहरी अधर्मी लोग मारे गये। सभी उल्लास में "हुह-हुह-हुह..." की आवाज़ निकालकर नृत्य करने लगे। 

जंगली नहीं देख पाये कि उल्का के कई टुकड़े सुप्त ज्वालामुखी में ऐसे कोण पर लगे की वह जाग्रत होकर फट गया। गर्म लावे का फव्वारा द्वीपसमूह पर आग की बारिश करने लगा। कुछ देर पहले तक सूमा धर्म के गुणगान गाते जंगली जान बचाकर भागने लगे। अधिकांश गर्म बरसात में मारे गये और जो ओट में बच गये उनकी तरफ आग की नदी तेज़ी से बढ़ रही थी। फिर भी अगर कोई बच गया तो उल्कापिंडो से समुद्र में उठी सुनामी कुछ मिनटों में दस्तक देने वाली थी। ज़मीनी सतह से काफी ढका होने के कारण दबाव में ज्वालामुखी भी उल्लास में "हुह-हुह-हुह..." की आवाज़ निकाल रहा था...शायद मन ही मन सूमा के ईश्वर का गुणगान और नृत्य भी कर रहा हो।

समाप्त!
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Thursday, April 5, 2018

रोग में मिला जोग...स्वर्ग में बनी शादी (कहानी) #ज़हन

Artwork - Vinj Gagui

मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जैना गर्भावस्था में ली कुछ महीनों की छुट्टी के बाद हॉस्पिटल काम पर लौटी थीं। रोज़ के काम के बीच कुछ कागज़ों ने जैना का ध्यान खींचा। शाम तक उन कागज़ों की बात जैना के मन में गोते लगा रही थी। आखिरकार उसने विभाग की नर्स से अपनी शंका का समाधान करना उचित समझा। 

"ये रिटायर्ड मेजर उत्कर्ष और मिस कोमल कैसे गायब हो गये? दोनों की मानसिक हालत दयनीय थी। मुझे तो लगा था...अभी कम से कम मेरे प्रसव के कई महीनों बाद तक इनका इलाज चलेगा।"

नर्स को ज़्यादा जानकारी नहीं थी, उसने इतना ही बताया - "डॉक्टर, उन दोनों ने शादी कर ली। उसके कुछ समय बाद दोनों का ट्रीटमेंट बंद हो गया।"

जवाब में जैना विस्मित सी केवल "क्या!" बोल पायी। 

अब तो इन दोनों में उसकी जिज्ञासा और बढ़ गयी थी। अन्य डॉक्टर एवम कर्मचारियों से संतोषजनक जानकारी ना मिल पाने की वजह से पूरी बात जानने के लिए जैना ने उनके घर जाने का फैसला किया। कोमल सालों तक घरेलु हिंसा की शिकार तलाकशुदा औरत थी और उत्कर्ष पड़ोसी देश से युद्ध की विभीषिका झेल चुका पूर्व-सैनिक था। इतने मानसिक और शारीरिक शोषण के बाद कोमल टूटकर गंभीर अवसाद में रहा करती थी। वहीं उत्कर्ष जंग में खून की नदियों में नहाकर पी.टी.एस.डी. (पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) से पीड़ित होकर अवसाद, घुटन से जूझ रहा था। दोनों के उपचार में जैना ने न जाने कितने जतन किये थे पर उसे अधिक सफलता नहीं मिल पायी थी। अब ऐसा क्या हो गया जो इतने कम वक़्त में ना सिर्फ दोनों ठीक हो गये बल्कि दो से एक हो गये। जैना नवदंपत्ति के घर पहुँची। दोनों ने अपने दुख की घड़ियों के एक पुराने साथी का स्वागत किया। औचारिकताओं के बाद जैना मुद्दे पर आयी। 

"...तो जो काम इतने टाइम मैं और मेरी टीम नहीं कर सकी वो प्यार ने कर दिया? जबसे आप दोनों के बारे में सुना है तबसे ये सवाल परेशान कर रहा है।"

कोमल चहक कर बोली - "हाँ डॉक्टर, प्यार ने भी और नफरत ने भी।"

जैना की उलझन और बढ़ गयी - "नफरत? मैं समझी नहीं। हॉस्पिटल में मानसिक रोगियों को ऐसे नकारात्मक शब्द तो हम लोग बोलने भी नहीं देते थे। तो फिर  इस से इलाज कैसे हो गया?"

उत्कर्ष ने मुस्कान देते हुए समझाया - "डरिये मत, हम दोनों ने आपकी कही हर बात पर अमल किया है। कहते हैं किसी एक बात के लिए प्यार होना...दो लोगो को करीब ला सकता है। जैसे घूमने के शौक में, कला के शौक में या किसी एक विषय के पागलपन में पड़े दो लोग कब एक दूसरे की तरफ आकर्षित हो जाएं पता भी नहीं चलता। हम लोग हॉस्पिटल में मिले और एक चीज़ के लिए दोनों की नफरत हमें पास ले आयी।"

जैना की जिज्ञासा के शांत होते ज्वालामुखी में से आख़री भभका निकला - "कौनसी चीज़?"

उत्कर्ष - "हिंसा!....हिंसा के प्रति हम दोनों का गुस्सा, उस से जन्मी घुटन से दोनों की दुश्मनी में कब हम एक-दूजे का दर्द समझने लगे...और मरहम लगाने लगे पता ही नहीं चला। कुछ ही हफ़्तों में जैसे पूरी ज़िन्दगी का लदा बोझ उतर गया और हम सामान्य जीवन जीने लगे। डॉक्टर, कभी-कभी दो दर्द एक-दूसरे का ध्यान बँटाकर ख़त्म हो जाते हैं। 

समाप्त!
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Wednesday, April 4, 2018

एड्रनलिन रश वाली झुरझुरी (कहानी) #ज़हन


दिलीप ने चलती गाड़ी से शराब की बोतल सड़क पर पटकी। नशे में कार चला रहे उसके दोस्त हफ़ीज़ ने उसे टोका। 
"ऐसे बोतल नहीं फेंकनी चाहिए! जानवरों और लोगों के पैरों में कांच चुभ सकता है। दुपहिया वालों का एक्सीडेंट हो सकता है।"
दिलीप ने उसे झिड़का - "साले! पापा को मत सीखा और कार भी नशे में नहीं चलानी चाहिए....लोग मर सकते हैं। फ़िर भी चला रहा है ना तू?"

हफ़ीज़ का मूड़ ठीक करने के लिए दिलीप दार्शनिक स्टाइल में आ गया।
"शराब, चरस में टुन्न रहना ही नशा नहीं है। भाई जीवन जी, मौज कर....एड्रनलिन रश को समझ! यूँ बिना देखे कार घुमा देना, बिना सोचे बोतल से लेकर किसी बेवक़ूफ़ की हड्डी तोड़ देना इस सब से जो झुरझुरी मचती है शरीर में उसे महसूस कर। भाड़ में गयी दुनिया!"

हफ़ीज़ की आशंका सच हो गयी और बोतल का बड़ा टुकड़ा अँधेरे में सड़क पार करती एक महिला माया की चप्पल चीरता हुआ उसके पैर में घुस गया। चोट के कारण अगले दिन माया जिस घर की सफाई और बर्तन करने जाती थी वहाँ जाने में लेट हो गयी। इधर सुबह-सुबह दिलीप को अचानक खांसी का दौरा उठा और शराब-गांजे के नशे में उसके मुँह और सांस की नली में उल्टी भर गयी। घर के बाकी सदस्य नींद में होने और माया के देर से आने के कारण जीवन के लिए दिलीप के संघर्ष  को कोई सुन नहीं पाया। दिलीप उसी दुनिया में सांस लेने को तड़प रहा था जिसे अक्सर भाड़ में भेजकर उसे एड्रनलिन रश वाली झुरझुरी मिलती थी। कुछ ही समय में उसकी मौत हो गयी। 

अपने बिगड़ैल बेटे को खोकर बिलख रहे परिवार के बीच माया सिसक रही थी। काम के बहाने खाली कमरे की आड़ में आकर उसकी सिसकारी हल्की हँसी में बदल गयी। आखिर एड्रनलिन रश की झुरझुरी पर केवल अमीरों का हक़ थोड़े ही है।

समाप्त!
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Sunday, March 25, 2018

Updates #ज़हन

23 March Shaheed Diwas Poetry

*)  - बसंती चोला मैला ना हो... 
...तो विदेशी लिबास में ढक लिया,
पीढ़ियों को आज़ाद करने...
अदने से पिंजरे का कश लिया!
गैरों की बिसात पर उसकी बात चल गयी....
कागज़ी धमाके से रानी की चमड़ी जल गयी
गर्म दल की आंच पर मुल्क का ठंडा खून उबालने वाला,
साढ़े तेईस बरस का भगत...गोरी हुक़ूमत पर साढ़े साती लाने वाला....


*) - आज़ादी की लहर में दोनों रुख के बंदे बहे, 
जहाँ नर्म दल के सिपहसेलार बने खुदा...
और प्यादे तक बादशाह हो गये,
वही गर्म दल के शहीद अपने ही देश में... 
क्रांतिकारियों से गुण्डे हो गये।

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को उनकी पुण्यतिथि पर नमन! 

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Latest release - Kathputli: A Struggle for Control (Short Movie by Freelance Talents)
Available: Vimeo, 4Shared, Dailymotion, Tumblr etc.


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FTC Season 4 in association with Nazariya Now

Wednesday, February 21, 2018

Bada Munh, Badi Baat - The Mohit Sharma Podcast Show


Nazariya Now Presents : Bada Munh, Badi Baat
''The Mohit Sharma Podcast Show''
Hindi, English
Coming Soon....

नज़रिया नाउ के सौजन्य से एक ऑडियो-पॉडकास्ट शो शुरू कर रहा हूँ। इस पॉडकास्ट शो में सामाजिक, हास्य, कला, प्रेरणादायक विषयों पर बोलूँगा, कभी काव्य-कहानी भी होंगी। आशा है इस नये माध्यम से आप सबके मन में और अधिक जगह बना सकूँ। 


Available: Vimeo, Soundcloud, 4Shared, Clyp, Dailymotion, Tumblr etc.

Tuesday, February 6, 2018

बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानी #3 - सामान्य जीवन (नींव पत्रिका में प्रकाशित)


बीनू बंदर अपने घर में सबका लाडला था। उसकी हर तरह की ज़िद पूरी की जाती थी। उसका परिवार भारत के उत्तराखण्ड प्रदेश स्थित जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय पार्क में रहता था। जंगल में अन्य युवा बंदर ऊँचे से ऊँचे पेड़ों पर लटकने, चढ़ने का अभ्यास करते रहते थे। वहीं बीनू को यह सब रास नहीं आता था। किसी के टोकने पर बीनू कहता कि जंगल के बाकी जीवों की तरह हमें सामान्य जीवन जीना चाहिए। उनकी तरह धरती पर विचरण करना चाहिए। छोटा और गुस्सैल होने के कारण कोई उसे अधिक टोकता भी नहीं था। एक बार वर्षा ऋतु में जंगल के बड़े हिस्से में बाढ़ आ गयी। बंदर समुदाय ने कई जीवों की जान बचायी जबकि बीनू मुश्किल से अपनी जान बचा पाया। 

बीनू निराश था कि वह अन्य बंदरों की तरह जंगल के जानवरों की मदद नहीं कर पा रहा था। बाढ़ का पानी सामान्य होने के बाद बीनू के माता-पिता ने उसे समझाया। हर जीव की कुछ प्रवृत्ति होती है, जो उसके अनुसार सामान्य होती है। संभव है अन्य जीवों के लिए जो सामान्य हो वह तुम्हारे लिए ना हो। इस घटना से बीनू को अपना सबक मिला और वह तन्मयता से पेड़ों पर चढ़ना और लटकना सीखने में लग गया।

समाप्त!

Monday, February 5, 2018

बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानी #2 - अवसर का लाभ (नींव पत्रिका में प्रकाशित)


मीता को खेलों में बड़ी रूचि थी। वह बड़ी होकर किसी खेल की एक सफल खिलाडी बनना चाहती थी। एक बार मीता के स्कूल में जूनियर क्रिकेट कैंप का आयोजन तय हुआ। इस कैंप में जबलपुर, मध्य प्रदेश शहर के स्कूली लड़कों और लड़कियों की अलग प्रतियोगिता होनी थी। कैंप में अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को भविष्य के लिए छात्रवृत्ति दी जाती। मीता ने सोचा कि क्रिकेट तो लड़कियों का खेल नहीं है। क्रिकेट में सिर्फ लड़कों का भविष्य है। उसने कैंप के लिए आवेदन नहीं दिया। क्रिकेट कैंप के दौरान ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम विश्व कप में उप-विजेता रही। इस खबर के बाद कैंप को अधिक प्रायोजक मिल गये। 

मीता की कक्षा की एक लड़की सौम्या को छात्रवृत्ति मिली और वह जूनियर स्तर की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में भी चुन ली गयी। अन्य खेलों में मीता हमेशा सौम्या से आगे रहती थी। अगर वह क्रिकेट कैंप में हिस्सा लेती तो निश्चित ही सौम्या की जगह सफलता पाती। मीता को सबक मिला कि जानकारी के अभाव में किसी अवसर को छोड़ देना गलत है। अगर किसी में प्रतिभा और लगन है तो किसी भी खेल में सफलता पायी जा सकती है। कोई खेल केवल लड़कों या लड़कियों के लिए नहीं बना है। मीता ने अब से हर अवसर का लाभ उठाने का निश्चय किया। 

समाप्त!

Sunday, February 4, 2018

बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानी #1 - पर्यटन का महत्त्व (नींव पत्रिका में प्रकाशित)


गुजरात स्थित गिर राष्ट्रीय उद्यान, वन्य अभ्यारण्य कई जीव-जन्तुओं को आश्रय देता है। वहाँ रहने वाले कुछ विद्वान जानवरों के बीच ज्ञान की होड़ थी। कोई किताबें पढता, कोई इंटरनेट पर खोजता तो कोई बड़े-बूढ़ों के साथ समय बिताता। हर विद्वान जानवर कई तरह से जानकारी हासिल करने की कोशिश में लगा रहता। हर वर्ष होने वाली विद्वानों की बैठक का समय था। सब विद्वान एक-दूसरे से अपना ज्ञान साझा करते और फिर सर्वसम्मति से विजेता की घोषणा की जाती थी। पिछले 12 वर्षों से भोला भालू सबसे बड़े विद्वान का खिताब जीत रहा था। इस बार भी विद्वानों की बैठक में भोला की जीत हुई। भोला मंच पर आया। उसने बताया कि वह इस प्रतियोगिता से संन्यास ले रहा है ताकि अन्य विद्वानों को अवसर मिल सके। साथ ही उसने अपनी जीत का राज बताया। 

भोला - "जंगल के सभी विद्वान ज्ञान का भण्डार हैं। एक जैसे स्रोत होने के कारण सबकी जानकारी लगभग बराबर है। मेरी अतिरिक्त जानकारी और अनुभव के पीछे पर्यटन का हाथ है। मैं देश-विदेश के मनोरम स्थानों पर घूमने जाता हूँ। वहाँ रहने वाले जीवों से मिलता हूँ। उनका अलग रहन-सहन देखता हूँ। उनसे वहाँ प्रचलित कई बातें सीखता हूँ। इस तरह किताबी जानकारी के साथ मैं वास्तविक जीवन का अनुभव जोड़ता रहता हूँ। यही कारण है कि मैं इतने लम्बे समय से गिर का सबसे बड़ा विद्वान बन रहा था।"

समाप्त!

Saturday, February 3, 2018

नये उपन्यास में नज़्म


शुभानंद कृत मास्टरमाइंड (जावेद, अमर, जॉन सीरीज) नॉवेल में प्रकाशित नज़्म।


अभी तो सिर्फ मेरी मौजूदगी को माना,
दिमाग में दबे दरिन्दों से मिलकर जाना। 
तुझे तड़पा-तड़पा कर है खाना,
पीछे दरिया रास्ता दे तो चले जाना।

कभी किसी की चीख से आँखों को सेका है?
कभी बच्चे का जिस्म तेज़ाब से पिघलते देखा है?
अभी वक़्त है...रास्ते से हट जाओ,
किसी का दर्द दिखे तो पलट जाओ।
जिसकी दस्तक पर दिलेरी दम तोड़ती है...
मौत से नज़रे मत मिलाओ!

क़ातिल आँधियों मे किसका ये असर है?
दिखता क्यों नहीं है हवा मे जो ज़हर है?
चीखें सूखती सी कहाँ मेरा बशर है?
ये उनका शहर है...

धुँधला आसमां क्यों शाम-ओ-सहर है?
आदमख़ोर जैसा लगता क्यों सफ़र है?
ढ़लता क्यों नहीं है ये कैसा पहर है?
ये उनका शहर है...

जानें लीलती है ख़ूनी जो नहर है.
माझी क्यों ना समझे कश्ती पर लहर है?
हुआ एक जैसा सबका क्यों हश्र है?
ये उनका शहर है...


रोके क्यों ना रुकता...हर दम ये कहर है?
है सबके जो ऊपर..कहाँ उसकी मेहर है?
जानी तेरी रहमत किस्मत जो सिफर है!
ये उनका शहर है....

इंसानों को तोले दौलत का ग़दर है!
नज़र जाए जहाँ तक मौत का मंज़र है!
उजड़ी बस्तियों मे मेरा घर किधर है?
ये उनका शहर है...
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#ज़हन

हाल ही में आयोजित सूरज पॉकेट बुक्स कार्यक्रम में यह नज़्म मंच पर पढ़ी।