Freelance Falcon ~ Weird Jhola-Chhap thing ~ ज़हन
Wednesday, May 29, 2013
Friday, May 17, 2013
नारीत्व - मोहित शर्मा (ज़हन)
नारीत्व – Author Mohit Sharma (Trendster)
Tags: Author Mohit Sharma, freelance talents championship, freelance talnte, mohit trendy baba, Mohit-Trendster, Mohit/Trendster, Poet Mohit Sharma, Story, Writer Mohit Sharma
*) – नारीत्व
(Mohit Sharma Trendster)
*) – Freelance Talents Championship (Round 1 winning Entry) against author Yogesh Amana Gurjar
*) – Indo-Canadian Kalamkaar 2013 Award.
*) – Part of Bonsai Kathayen (Book 2).
अजीब है ना कुछ बड़ी घटना होने पर आँखों के सामने बना और चल रहा परिद्रश्य कितना धुँधला लगता है। आज वो अंधी भिखारन कबसे पुलिस क्वाटर के बाहर आवाज़ लगा रही थी जिसे अक्सर ईला यूँ ही बातें करती थी और खाना खिलाती थी। सख्त गर्मी के बाद पहली बारिश हो रही थी जिसका उसे कबसे इंतज़ार था, आस-पास सूखे पेड़ पौधे अचानक से नहा-धो कर ताज़ा हरे से हो गए थे। रेडियो पर उसकी पसंद का कार्यक्रम आ रहा था पर हाथ में थमे अपने बर्खास्ती पत्र के सामने यह सब जैसे कहीं दूर किसी और की दुनिया का हिस्सा लग रहा था।
ईला के ज़हन में लगभग दो साल पहले की यादें चलने लगी जब वो उत्तर प्रदेश के 1982 बैच की 38 महिला पुलिस कर्मियों में से एक थी और अपनी ट्रेनिंग पूरी कर पुलिस की वर्दी पहन अपने गाँव गयी थी। शेर आ जाने पर जैसे हिरण, खरगोश जस के तस “स्टेचू” सा बन जातें है वैसे पूरा गाँव ही थम गया। पिता जी चमेल पंडित तो ख़ुशी के मारे छोटे बच्चों की तरह हरकतें कर रहे थे और सवाल पूछ रहे थे, माँ के गुजरने के बाद पिता जी के जीने का सहारा ईला ही थी। उसकी दो छोटी बहन कोमल और दीक्षा ने भी अपनी बारहवी और सातवी की परीक्षा दी थी। पिता ने जैसे तैसे ईला को काबिल बनाने मे अपनी ज़मीन, पूँजी गवाँ दी अब ईला को दारोगा बने देख कर उन्हें अपने बलिदान सार्थक लग रहे थे। घर के बाहर मेले जैसी भीड़ लगी थी,आस-पास के गाँवों से भी लोग लड़की दारोगा को देखने आ रहे थे। थोड़ी देर बाद पिता जी ने अपनी इच्छायें रखी।
चमेल – “ईला बेटे एक तो पुराना जमींदार है उसके यहाँ जीप लेके डंडा फटकार आ, कम से कम उसकी खिड़की-किवाड़ तोड़ आइयो, करमजला कहता फिरता था की मैंने अपनी बेटी खुद ही शहर भगा दी। कोमल की बारहवी हो गयी है इसको भी शहर ले जा और अपनी तरह कुछ बना दे, घर की मरम्मत करवा दियो और बेटी एक पट्टे वाली बड़ी घडी दिलवा दे मुझे!”
ईला – “ठीक है पिता जी सब कर दूँगी …पर एक महीने की तनख्वा के हिसाब से आप कुछ ज्यादा लालच नहीं दिखा रहे? हा हा …और बड़ीदीवार घडी? वो क्यों चाहिए?”
चमेल – “बेटा देख मै तो अनपढ़ हूँ, घड़ी माथे पर बांध लूँगा जिसको समय देखना आता होगा उसी से पूछ लूँगा की भैया क्या बज रहा है?कहने को भी हो जायेगा बिटिया ने कुछ बड़ा तोहफा दिया है।”
इन दो सालों मे ईला ने अपने वेतन से जो घर भेजा वो पिता के लिए कर्जो के आगे काफी कम था अभी घर को तारने मे उसे कुछ साल और लगने थे क्योकि वो अपनी ड्यूटी ईमानदारी से कर रही थी जो सरकारी विभागों खासकर पुलिस मे कम देखने को मिलता है।
ईला की पहली नियुक्ति हुई संजयनगर जिले और आस-पास के क्षेत्रो के एकमात्र महिला थाने मे। संजयनगर कोतवाली के थाना प्रभारी थे इंस्पेक्टर सुमित कुमार। काफी मामलो, अपराधो में संयुक्त जाँच, गश्त,दविशों में सुमित और ईला मिल कर काम करते थे। सुमित एक अनुभवी, प्रोढ़ और ईला की तरह ही कर्तव्यनिष्ठ थाना निरीक्षक थे कुछ ही महीनो में ईला ने उनसे बहुत कुछ सीखा था और दोनों थानों ने मिलकर कई अपराधिक एवम पारिवारिक मामले सुलझाये थे। पुलिसिया भाग दौड़ में कैसे इतने महीने गुज़र गये पता ही नहीं चला।
एक रात दहेज़ उत्पीडन के एक मामले में ईला अपने सहकर्मी सुमित,उनके 2 सिपाही और अपनी 2 महिला आरक्षी के साथ संजयनगर के क्षेत्र मे एक गाँव बिधोली पहुँची। गाँव के बाहर गेंहू की फसल से घने खेतो में डेरा जमाये कुछ बदमाशो के एक गिरोह को पुलिस जीप देख कर यह उनके लिए की गयी दबिश है। गाँव में घुसने से पहले ही पुलिस जीप पर फायरिंग शुरू हो गयी। इस अप्रत्याशित हमले में गाडी चला रहे सिपाही कुलदीप के हाथ में गोली लगी और जीप असंतुलित होकर कच्चे रास्ते से डगमगा कर पलट गयी। सुमित ने जीप से निकल कर ईला और बाकी साथियों को निकाला। ईला को मामूली चोटें आयी थी पर जीप पलटनेसे पहले बदमाशो द्वारा चलायी गयी गोलियों से पीछे बैठी दोनों महिला सिपाही घायल हो गयी थी, एक गोली इंस्पेक्टर सुमित के कंधे पर लगी थी।
स्थिति विकट थी, पारिवारिक मामला समझ कर हथियारों की इतनी ज़रुरत नहीं समझी इस पुलिस दल ने। अब सिर्फ एक सिपाही की राइफल, इंस्पेक्टर सुमित कुमार और ईला की अपनी-अपनी रिवाल्वर थी। सुमित का पहला सवाल था।
“चल पाने की स्थिति मे कौन-कौन है?”
ईला के अलावा एक पुरुष आरक्षी नितिन भी ठीक हालत मे था। सुमित का अगला निर्देश था।
“वायरलेस टूट गया है। गाँव इस बाग़ के रास्ते से डेढ़ मील दूर है,ईला जी और कांस्टेबल नितिन आप दोनों अपने कंधो पर दोनों घायल महिलाकर्मियों को लेकर जायेंगे और उनके इलाज का इंतज़ाम करने के बाद ही लौटेंगे। ग्राम प्रधान या किसी जमींदार के पास बंदूकें हो तो लायेंगे। वैसे ड्राईवर कुलदीप भी घायल है पर कपडे से खून रुक गया है और इसकी नब्ज़ ठीक है।”
सुमित का बायाँ हाथ अजीब तरह से मुड़ा था और ईला बता सकती थी की वो जीप के भार से बीच मे से टूटा है, ऊपर से कंधे मे लगी गोली। पर अपने दल का मनोबल न टूटे इसलिए सुमित किसी पीड़ा का निशान तक नहीं दिखा रहा था। ईला कुछ पलो तक जैसे मूरत बन अपने आदर्श, गुरु को देखती रह गयी।
ईला – “लेकिन सर आप??”
सुमित – “अभी के लिये मै ठीक हूँ, आप अपनी रिवाल्वर निकाल कर रखियेगा, यहाँ और बदमाश भी हो सकते है। हम दोनों आप लोगो को कवर फायर देते है।”
मन के अंतहीन प्रश्नों से गुथमगुत्था ईला अपने ऊपर एक महिला कांस्टेबल को टाँगे दौड़ पड़ी। गाँव में ईला और नितिन ने प्रधान के घर पर घायलों को छोड़ा और गाँव मे उनको केवल एक देसी दुनाली और उसकी दो गोलियाँ मिली। दोनों को लौटने में एक घंटा लग गया। पुलिस पार्टी अपने तीनो हथियारों की गोलियाँ ख़त्म हो चुकी थी,सुमित अपने अंदाजों से 3 बदमाश मार चुका था। अब सिर्फ दुनाली और उसकी दो गोलियों की वजह से ओट में छिपे रहने के अलावा कोई चारा नहीं था। लगातार 4 घंटो तक दोनों तरफ से कोई गतिविधि नहीं हुई,आख़िरकार अपना दर्द कम करने के लिये और अपना ध्यान बँटाने के लिये लेटे हुए सुमित ने बीडी सुलगायी। पर कभी-कभी अनुभव में भी चूक हो जाती है अँधेरे में बीडी की चमक देख बदमाशों ने उस दिशा में कुछ गोलियाँ चलायी जो सुमित के सर को भेद गयी और सुमित की मृत्यु हो गयी।
लगभग हमेशा बदमाश पुलिस से मुतभेड टालना ही बेहतर समझते है और मुतभेड होने पर जल्दी ही स्थिति से निकलने कि कोशिश करतेहै। पर ये सगे-संबंधियों का गिरोह था जो अपनों के मर जाने पर बदला लेने की इच्छा से घंटो डटा हुआ था। बदमाशो को अंदेशा हो चुका था की पुलिस दल की गोलियाँ ख़त्म हो चुकी है, अपनी जीप को वापस पलट रही ईला और दोनों सिपाहियों पर बचे हुए 3 बदमाशों की गोलियों की बौछार सी हो गयी। दोनों सिपाही वहीँ गिर पड़े और वापस पलटी जीप के बीच मे ईला दब गयी उसकी जांघ को छू कर एक गोली निकली थी। निडर बदमाश अब बढ़ते दिखायी दे रहे थे ईला ने अपनी पूरी इच्छाशक्ति जुटा कर कुछ दूर पड़ी दुनाली तक हाथ पहुँचाया और उसको चलाया, दुनाली जाम हो गयी थी या शायद बाबा आदम के ज़माने की दुनाली अब चलने की हालत मे नहीं थी। देसी हथियार कब चल जायें और कब धोखा दे जाये कुछ कहा नहीं जा सकता। वैसे ईला ने गाँव वालो से शहर संदेश भिजवाने को कहा था पर मदद आने मे घंटो लग जाने थे। गाँव वाले भी डर से इस और नहीं आने वाले थे। इधर वो तीन बदमाश मौके का जायजा लेने लगे।
“लड़की? पुलिस में लड़की?”
“अबे वो सीता और गीता मे लड़की भी तो पुलिस थी!”
“अब इसको कैसे मारें? हमारी गोलियाँ भी ख़त्म?”
“अबे! लड़की है इसको मारने की क्या ज़रुरत है ..हा हा हा!!!”
फिर तीनो बदमाशो ने जीप से ईला को खींच कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। अपने और अपने साथियों के खून की गंध, अपनी आँखों से अपने शरीर से अलग होती वर्दी देखने की बेबसी, सामने सर खुली अपने आदर्श इंस्पेक्टर सुमित की लाश, और इतने दर्द के बीचअपने शरीर और आत्मा का चीरहरण। दुनिया कहती है नारी एक पहेली है पर आज ईला को पुरुष के रूप चौंका रहे थे, एक तरफ निर्जीव पड़े सुमित, कुलदीप, नितिन और एक तरफ उसके नग्न शरीर से खेलते ये 3दरिन्दे। कुछ देर के लिये ईला अपनी मानसिक और शारीरिक वेदना से अचेत हो गयी। बदमाश उसको मरा समझ भाग निकले। ईला होश मे आई तो उसने खुद को संभाल कर वर्दी पहनी और साथियों पर नज़र डाली। सुमित तो पहले ही मर चुके थे पर नितिन और कुलदीप की साँसें चल रही थी।
ईला ने अपनी पूरी ताकत झोंक कर किसी तरह जीप को खड़ा किया। तुरंत दोनों सिपाहियों को जीप मे डाला। जीप की हालत ठीक थी। ईला जीप चलाकर गाँव से निकली और काफी दूर उसे वो बदमाश जाते दिखे, ईला ने ढलान पर जीप बंद कर दी और पीछे से उनके पास पहुँचते ही जीप स्टार्ट की, ईला के मन में उन तीन दरिंदो के विरुद्ध आक्रोश बहुत था पर इस घड़ी में भी अपना मानसिक संतुलन ठीकरखते हुए सधे कोण से जीप चलाने से तीनो बदमाश जीप के नीचे आ गए जिनमे से एक मरा हुआ जीप से घिसटता हुआ कुछ दूर तक गया और बाकी दो घायल होकर वहीँ गिर पड़े। ईला के पास समय कम था तो वो सभी बदमाशो को मरा समझ वहाँ से निकल गयी।
शहर पहुँचने पर ईला ने दोनों सिपाहियों को अस्पताल भर्ती कराया और कण्ट्रोल रूम सूचना दी जिस से जिले मे हडकंप मच गया और भारीसंख्या मे पुलिस बल बिधोली के लिए रवाना किया गया। कुलदीप को उठवाते वक़्त उसकी गर्दन एक और झूल गयी और अब तक दृद खड़ी ईला की आँखें अपनी बेबसी पर नम हो गयी। वो खुद को दोष देने लगी की उसने जीप सीधी करने मे कितना समय लगा दिया, वो कुलदीप को बचा सकती थी।
अपने मेडिकल में ईला ने अपनी बाहरी चोटों का ईलाज करवा लिया पर खुद से आँखें चुरा कर अपने बलात्कार की बात छुपा ली। मौके पर पहुँची पुलिस को मृत सुमित कुमार और गंभीर रूप से घायल महिला आरक्षी मिली। खेत मे मरे बदमाशो की लाशें मिली पर ईला की जीप से कुचले गये बदमाश नहीं मिले, शायद वो दोनों अपने साथी को उठा ले गए। दूसरा सिपाही नितिन जिंदा बच गया पर सर पर लगे आघातों से उसके शरीर को लकवा मार गया और वो कुछ बोलने तक की हालत मे नहीं बचा।
ईला जाँच मे पूरा सहयोग दे रही थी पर वो अन्दर से टूट चुकी थी। अपने ऊपर हुए अत्याचार को छुपाने की वजह से वो खुद से भी नज़रे नहीं मिला पा रही थी। संजयनगर के एक नेता को इस मामले मे राजनैतिक मौका दिखाई दिया, उसने शहीद सुमित कुमार के परिजनों को लेकर ईला के घर और थाने के बाहर अपने समर्थको की भीड़ के साथ धरना दिया और सीधे आरोप लगाये की ईला ने जान बुझ करइंस्पेक्टर सुमित कुमार की मौके पर मदद नहीं की क्योकि ईला एक पंडित थी और सुमित कुमार एक हरिजन, बाकी दो सिपाही भी हरिजन थे जिसकी वजह से ईला उनका साथ छोड़ अपनी सुरक्षा के लिए मौके से भाग गयी या छुप गयी। वो मौके पर छुपी रही और बदमाशो के जाने का घंटो इंतज़ार करती थी, बदमाशो के जाने के बाद हीहरकत मे आकर ईला ने उन्हें बचाने की खानापूर्ति की। शक की कुछ जायज़ वजहें थी जैसे उस नेता ने दलील दी की ईला को कोई गंभीर छोट नहीं आई अपने बाकी साथियों की तरह। ईला द्वारा ग्राम प्रधान से मांगी गयी दोनाली जो उस वक़्त जाम हो गयी थी अगले दिन पुलिस दल द्वारा चेक करने पर कैसे चल गयी?
जब इन आरोपों का ईला को पता चला तो उसका शरीर, मन सुन्न पड़ गया, वो कांपने लगी। ये डर, गुस्सा या दुख नहीं था, यह एक हार का एहसास था की अपनी पूरी कोशिश के बाद भी, इतने बलिदान के बाद भी, सब कुछ हमेशा के लिए बदलने के बाद भी हार…ईला को अपने सहकर्मियों के नाम के अलावा उनके बारे मे कुछ पता नहीं था न उसने कभी कुछ जानना ज़रूरी समझा..खुद को इतना अकेला कभी नहीं पाया ईला ने, हर ओर से ताने, कटाक्ष यहाँ तक की उसकी अपनी अंतरआत्मा भी उसको दुत्कार रही थी।
वैसे पुलिस विभाग मे भी ये बातें दबी जुबान में चल रही थी। ईला पर पुलिस विभाग और मानवाधिकार आयोग की संयुक्त जाँच बैठाई गयी। कुलदीप मर चुका था, लकवाग्रस्त नितिन कुछ बोलने की हालत मे नहीं था और दोनों महिला कर्मियों के बयान जीप पलटने और गाँव आने तक थे। मौके की चश्मदीद और इस जाँच मे आरोपी सिर्फ ईला थी। संवेदनशील मामला होने के कारण और ईला के पक्ष मे कोई सबूत ना होने की वजह से ईला को ड्यूटी मे लापरवाही बरतने और अपने साथियों की जान न बचाने के आरोप मे बर्खास्त कर दिया गया। अख़बार, जनता, सहकर्मियों और शीशे में अपनी घृणा भरी नज़रें ईला को रोज़ गोलियों की तरह भेद जाती थी।
ईला अपनी असीम वेदना छुपाकर एक साल ये मामला लडती रही और आख़िरकार हारकर उसने आत्महत्या कर ली। पंडित परिवार पर तो जैसे विपदा आ गयी, बेटी के कूकर्मो का हवाला देकर गाँव से सामाजिक बहिष्कार तो पहले ही हो गया था अब घर का सहारा भी उनका साथ छोड़ गयी। ऊँचे सपने देखने के लिये चमेल पंडित खुद को दोष देनेलगा। खेत और जमा-पूँजी जा चुकी थी अब कोई दिन जा रहा था जो शायद ये परिवार भी अपना जीवन समाप्त कर लेता की तभी एक दिन उनके दरवाज़े पर दस्तक हुई, दरवाज़ा खुला ….ये कांस्टेबल नितिन था जो अब आंशिक रूप से ठीक हो चुका था पर अभी भी बोल नहीं पाता था पर चमेल के सामने उसकी आँखें ही इतना बोल रही थी की जुबान की ज़रुरत ही नहीं पड़ी। नितिन ने परिवार की उस संकट की घड़ी मे आर्थिक मदद की और उन्हें अपने साथ ले आया। नितिन के घर मे बने पूजा घर भगवानो, देवियों मे एक तस्वीर ईला की भी थी, नितिन ने अधमरी अवस्था में सब कुछ देखा था …एक देवी का हर बलिदान देखा था जिसकी वजह से आज वो जिंदा था।
समाप्त!
Sunday, May 12, 2013
Potential of Unconventional Sources of Natural Gas in India (Book)
100 Page Redacted Project Report : "Potential of Unconventional Sources of Natural Gas in India"
Available - Smashwords, Pothi, Medifire, ISSUU, Minus, Readwhere etc....
ISBN: 9781301257324
http://www.smashwords.com/ books/view/315546
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ISBN: 9781301257324
http://www.smashwords.com/
- Mohit Sharma (Trendster / Trendy Baba)
Wednesday, April 24, 2013
Tuesday, March 26, 2013
Procrastination vs. भोले शंकर (Bonsai Kathayen)
मेरी जनवरी 2013 मे प्रकाशित हुई किताब Bonsai Kathayen से एक और पेशकश।
कक्षा 9 का छात्र शुभम कल होने वाले मैथ्स के एग्जाम को लेकर चिंतित था।
ये थ्योरम समझ नहीं आ रही नेट पर देखता हूँ। आदतन उसकी उँगलियों चली और उसने पहले,
*) - कुछ स्पोर्ट्स स्टार्स और रस्लर्स की प्रोफाइल्स चेक की।
*) - यूट्यूब पर कुछ आगामी फिल्मो के प्रोमोज़ देखे।
*) - सोशल साइंस जिसका पेपर हो चुका था के रैंडम फैक्ट्स, हालाँकि सोशल साइंस के पेपर से पहले इन्होने सतपुड़ा के जंगल और रेसलरस चार्ली हास और रैंडी ओर्टन की जानकारी लेते हुए घंटो बिताये थे पर आज इन्हें सोशल साइंस भी बड़ी रोचक लग रही थी।
इतना सब करने मे 3:30 बज गए और जब पढाई याद आई तब तक शुभम थक चुका था, उसने सुबह 6 बजे का अलार्म लगाया और सुबह सब जल्दी से देख लूँगा सोचकर सो गया। सुबह 9 बजे उसके भाई ने उसको उठाया जिसको लगा की ये रात भर पढ़ा है। 10 बजे से परीक्षा थी। शुभम ने घड़ी देखी तो वो डिप्रेस हो गया, इतनी जल्दी वो नहाये-धोये, खाए, स्कूल पहुंचे ... का जो सोचा था सब रह गया।
उसको गुस्सा भी आ रहा था की वैसे गलती से सेट हो जाए तो बिना बात के अजीब टाइम पर बज जाएगा पर जब ज़रुरत थी तो मोबाइल वाला अलार्म आखिर बजा क्यों नहीं? तब उसने ध्यान दिया की मोबाइल घड़ी मे AM की जगह PM सेट था।
"अब तो भोले शंकर का नाम लेकर ही एग्जाम देना पड़ेगा।"
- Mohit Sharma (Trendy Baba / Trendster)
Ishq mey Chloroform
Ishq mey Chloroform
-
Mohit Sharma (Trendster / Trendy Baba)
Ronit apne
mohalle ki Rinnie naam ki ladki par flat tha. Dono jawan the, ek hi college mey
padhte the, hesiyat mey bhi zyada antar nahi tha aur caste bhi ek thi. Matlab
jaise kisi marathon runner ne 1-2 kilometers ki lead le li ho runner-up se.
Cake Walk! Par Ronit ko baat taalne ki badi aadat thi. Rinnie use dekh kar
muskurati thi, hint deti thi aur different prakaar ki mada aakarshan
demonstration waali harkaten karti thi par saath engineering k baad MBA k bhi 2 saal ho gaye to Rinnie ko laga ye
banda Lolu-Chand hai.
Ronit sahi
mauke aur build up mey vishvaas rakhta tha. Rinnie k papa Mr. Pralay Pandit
festivals mey us colony ki Samiti k swaghoshit sachiv the jabse wo aaye the
colony mey. Ronit unko impress karne k liye kuch saalo se festivals par kaafi
mehnat kar raha tha jis se Mogambo…..I mean Uncle ji khush bhi huey. Kai
seasons mey lagataar aakhri moment par himmat jutane mey fail hone k baad Is
baar usne decide kiya ki Diwali ka mauka achchha hai shaadi ki baat direct
achchhe mood mey Uncle ji k saamne rakhne ka. Ronit ko 2 din pehle pata chala
ki is baar Pandit family 2 shaadi attend karne
Gwalior jaa rahe hai. Ronit ne bina baat k Madhav Rao Sindhiya ji ko
kosa kyoki wahi ek naam tha Gwalior se related uske zehan mey.
Ab baari thi
next big festival Holi ki, to Holi waale month mey Ronot k ghar Rinnie ki
engagement ka invitation aaya, pata chala ki shaadi bhi April mey hi hai. Ronit ne April mey paida huey apne ek
dost ko ashleel gaaliyan suna kar apna krodh shaant kiya (kyoki April month se
related wahi banda pehle dimaag mey aaya Ronit k).
Orthodox aur
andhvishvaadi Pandit ji ka parivaar, Rinnie ko ab kisi ki nazar na lag jaaye
isliye bechari duniya se alag total lockdown ki jaa chuki thi. Ronit ne decide
kiya ki wo aaj raat hi Rinnie ko manane ki kosish karega chupke se. Ronit
rassi, slice ki bottle (pata nahi kyu laya gadha), torch, mask, chloroform
(emergency k liye….aur rumaal bhul gaya sunghayega kaise/kisko ye ek sawal tha)
lekar bagal k pipe se chadhne laga par lagta hai uspar shani ki dasha chal rahi
thi Pipe se girkar wo bagal waale lawn ki ghaas kaatne waali machine par gira.
“AAAAAAAIIIIIIIIEEEEEEEEE…..Mummy!!!”
Usne kisi
tarah dard control kiya, kuch serious to nahi hua tha par uska pairon mey moch aa gayi thi, haath-pair chhil bhi gaye the aur Slice ki bottle bhi fat gayit
thi. Wo kuch samay tak dard k mare nirjeev pada raha, aesa lag raha tha jaise
wo ek laash hai bas antar ye tha uske charo taraf khoon ki jagah mango juice faila
hua tha.
Tabhi usko
ek aawaz ne instant-sanjivni ki tarah attention mode mey khada kar diya kuch
nanoseconds mey.
“Kaun hai
wahan? Mai shor machaungi. Wait kahin tum….Utho”
“Ronit! are
you OK? Chot to nahi lagi? Ye sab karne ki kya zaroorat thi. College mey hi bol
dete…I like you too. Ye chloroform kyu? Kidnap karoge kya?”
“Naina, wo baat nahi hai….”
Tabhi Naina ki mummy ki aawaz aayi andar se jo is aur badh
rahi thi.
“Ye kaisi
aawaz thi kaun hai wahan? Naina Beta kya toota?”
Naina ki
mummy ki aawaz se to jaise dono ki mummy si mar gayi.
Naina - “Ab
kya Karen? Mummy maar daalengi mujhe…”
Ronit – “Mai
cooler ki aad mey chhup jata hun andhere mey…”
Naina – “Tum
Mummy ko nahi jaante, aayin hai to sab check karke jayegi poori tassalli se, dekho wo
paanch rupaye waali one beam torch leke aa rahi hai.”
Ronit – “Mai
chloroform to laya hun par hanky bhool gaya ghar pe, ab kya karun?”
Naina – “Hey
Bhagwan…..”
Tabhi Mummy
close in flieder ki tarah agrasar hui aur Ronit cooler ki aad mey hua.
“Kaun tha
wahan?”
Naina – “Koi
dikha nahi, Maa…ped ki side dekho.”
“Pehle ghar
ki side dekhungi…”
Yaani ab
Naina ki Mummy ki 'use and throw' torch aur Ronit k beech 10-12 seconds ka antar
tha. Naina ki mummy palti aur Naina ne Suresh Raina si furti dikhate hue apna
duppatta utaara aur mummy ki one beam torch k upar se Ronit ko timely paas kiya
jisme chloroform duppatte par lagayi aur beam ko cover karte hue Bombastic
fidayin hamla kiya jisme aunty off guard caught hui aur Out hui!
Naina ki
baaton aur harkaton ne Ronit ko bataya ki usko Naina kitna chahti hai.
Jaate-jaate 2-4 chummiyan exchange hui aur agli Diwali Ronit rishta lekar Naina
k ghar pahuncha.
….Samaptam!!!!
Moral of the Story – Dil beauty se kahin decade zyada durable hota hai on an
average to logo k dil ko dekho. Jo tumhe pyaar kare usko apnao, uske peechhe bhaagne
se faayda nahi jiski priorities ka tum hissa na ho.
....aur Trendy Baba k darbaar mey chanda chadhane se manchaha rishta
milta hai given aapke chande ka amount chindi-chor type na ho.
Pic Courtesy - Mr. Harjeet Singh Chadha
Monday, March 18, 2013
Pagli Holi Festival Rap (Fiction Comics)
Pagli Rap! Happy Holi Everyone!
Drunk Drivers today are my toys Roly-Poly !!
Perverts stare/touch at your own risk…Ouch! My electric Ghaghra-Choli !!
I know…I look like a cute Barbie-Dolly…but my slams are like Hardcore Holly!!
Have fun, Ghujiyas, play safe make some Tolis…kids stay away from dirty Boli !!
Wish You All a Happy-Prosperous-Holy Holi !!
- with Artist Mr. Raj (Seedhi Baat No Bakwaas)
Drunk Drivers today are my toys Roly-Poly !!
Perverts stare/touch at your own risk…Ouch! My electric Ghaghra-Choli !!
I know…I look like a cute Barbie-Dolly…but my slams are like Hardcore Holly!!
Have fun, Ghujiyas, play safe make some Tolis…kids stay away from dirty Boli !!
Wish You All a Happy-Prosperous-Holy Holi !!
- with Artist Mr. Raj (Seedhi Baat No Bakwaas)
Sunday, March 17, 2013
अधूरी रस्म (Rajan Iqbal Reborn Series)
अधूरी रस्म
फ़ासलों कि ज़बानी कह गयी ....
रास्तों कि कहानी कह गयी ...
अरसो वाली ईद कि तैयारी ....चंद पलो मे वीरानी रह गयी ...
मौसम को सजदा करती फसल .....तेरे इंतज़ार मे खड़ी रह गयी।
खुशियाँ साथ बांटने की बात से बरगलाया,
फितरत में झूठ बोलकर उसका दिल बहलाया ....
रह गया ये मलाल बाद तक ....
दीवाना मेरी कब्र पर गुलाल ले आया।
कुछ फकीरों के एहसान रहे मुझपर ...
वतन कि उन गलियों का मेरा क़र्ज़ चुका देना ....
काश बुज़दिली और मजबूरी का फर्क समझाने का वक़्त होता ....
ज़मीन पर पड़े पुराने ख़त उनके पतों पर पहुँचा देना।
अधूरी रहीं वो पुरानी रस्म निभा देना ...
न वो दिखता, ना वो छुपता ...बरसता जब आसमां से पाक रहम ....
भरोसा रख तू ऐ बंदे जल्द साथ देंगे मौसम ...
गिले-शिकवे, दगा-धोखे ....गला देगी हवा वो नम।
सियासतदान तुमसे मेरा अक्स मिलाते होंगे ...
बस मेरे अंजाम से अपना अंजाम मत मिला लेना।
शाम को हाथ मे पिघलने न देना ...
अगर लफ़्ज़ों पर पाबंदी लगे उनकी ....तो मन में दुआ पढना ...
अधूरी रहीं वो पुरानी रस्म निभा देना ...
न जाने कितनी गोलियों पर नाम है तेरे वालिद का ...
अदब से उन सब को अपनी मयान मे सजा लेना।
अधूरी रहीं वो पुरानी रस्म निभा देना ...
मंजिलों के इश्क मे ज़ालिम रास्तों के हाथो,
हजारों शिकार यूँ जो मरते .....
रेगिस्तान मे नादानी से उगे पौधे,
सावन के आने का इशारा नहीं करते .....
अधूरी रहीं वो पुरानी रस्म निभा देना ...
चुड़ैल सी मुझपर चढ़ी वतन की मोहब्बत ...अपनों के प्यार पर इस कदर पड़ी भारी,
मै तो फिर कभी गाँव आ ना सका ....तुम घर वापस ज़रूर लौट जाना।
- Mohit
Friday, March 8, 2013
Not a Potential Rapist!!!
Apne kuch jigri doston (naam nahi likhunga) se khul kar baaten kar pata
hun. Halaki, ab Lucknow chhut gaya to ye cheez miss karunga. Unhi khaas
dosto mey se ek k saath baitha tha mai last month.
Dost - "Ye heading padh, likha hai...every man is a potential rapist..."
Mohit - "Nahi!!! Maafi sarkaar maafi de do mujhe.....yaar yahan to
baksh de TV, Internet, Akhbar, Society...sab jagah blame karoge to kisi
din bina crime kiye in blames ka hawala dekar jail mey guilty feel karta
hua life kaatunga..."
Dost - "Kaisi Life Inspector Vinay??? Fansi milni chahiye tujhe..."
Mohit - "To tu bhi marega soch lo....ya phir OMG aaj pata chala mera
dost mard nahi hai...ha ha ha...medical report k baad jail ka doctor
kahega...jaa Shikhandi ji le apni zindagi...."
Dost - "Achchha ek baat bata teri favorite actress, athletes kaun hai....matlab skip a beat...wonder woman type..."
Mohit - "Aajkal to Esha Gupta achchhi lag rahi hai, sports mey Ana Ivanovic...aur bhi hai kuch....kyu?"
Dost - "Achchha imagine kar....tu kahin ka raja hai, tu matlab us desh
ka supreme hai tujhe koi darr nahi hai, kuch bhi kar....koi nahi
pakadega tujhe...tab tujhe sunsaan sadak par koi Ana Ivanovic ya Esha
Gupta jaisi ladki mil jaaye..."
Mohit - "C grade horny movie ka hero bana de mujhe kaminey...."
Dost - "Sun to....khuli chhut hai...koi darr nahi, bandish nahi...kya tu us ladki ka rape karega?"
Mohit - "Nahi...koi chance hi nahi hai."
Dost - "Bhai ko khush karne ko mat bol sach bata....mujhse sach bol
sakta hai Bhai...chal tu nashe mey hai...dimaag mannd ho gaya hai kuch
der k liye...tab karega uska rape?"
Mai darr gaya ye sochkar,
kya karunga mai tab? Kya mai rape kar dunga us ladki ka? Maine pehli
baar khud ko kisi aur vyakti k angle se rape karte dekha...us ek second
mey hi mai bas kya bataun...hil gaya...
Mohit - "Bhai..maan li
teri baaten ki mai raja hun, mujhe koi darr nahi, mai supreme hun, koi
saza nahi hone waali mujhe, mera dimaag mand pad gaya hai....par jab wo
ladki chillayegi, royegi na to mere haathon ki pakad apne aap dheeli pad
jaayegi....aage kuch nahi karega tera bhai....ye antar hota hai mard
aur jaanvar mey..."
Dost khush hokar gale lag gaya.
Dost - "Mohit Bhai dil khush kar diya...mai yahi test kar raha tha..."
So, ye hai mera conclusion.....
"Mana India mey 1-2 Australia ki population jitne dooshit mansikta waale purush hai
par unke liye 4-5 Russia ki population jitne sahi purusho par gaaj kyu? Kyoki jab laws
banti hai to unke ghere mey kai nirdosh bhi pis jaate hai. Ye kaisi
victim mentality hai ki doosre group (is case mey gender) k har bande ko
criminal bata do. Majority of men would never rape anyone. Men don't
just rape people because they feel horny, it's not that basic. Most can
resist the lust they have....many men can see what they are doing is
wrong. Can I be swayed by my anger and turned into a murderer? Nope.
People can't just be "swayed" by emotions and turned into something they
weren't already.
Don't trust the secondary info sources to the
level that they brainwash you...understand other aspects related to the
matter and VERIFY!!!.....Every man has the ability to rape, but so
what? If a man has the ability to rape, would you call him a 'potential
rapist'? Every woman has the ability to kill a baby, does that mean
every woman is a potential child killer? Everyone (except disabled
people) has the ability to kill, does that make everyone a potential
serial killer?....Every human being has the potential to be anything.
Rape is not an act of lust nor is it gender specific. Rape is an act of
power and violence. Women rape fellow humans every day. Yes, I mean
actual sexual assault kind of rape. Men are just more associated with
rape because, as a group, they tend to be more physically violent than
women."
- Mohit Sharma (Trendster)
Saturday, February 2, 2013
Long Live Inquilab...Returns! (Comig Soon!!!)
Second Book of Long Live Inquilab Series with new addition to the team in the form of talented Harish Atharv Thakur.
विद्रोह के हवन मे अरमानो की आहूती बरसों दी जाती ...
कितनी बहनें सूखी राखी मनाती ....
दीवारों के सहारे टिकी माँ महिनो का हिसाब भूल जाती ..
यारों की गलियाँ अरसों दीवाली-ईद कहाँ मानती ...
कभी मेरी तस्वीर से नज़रे मिलाना शायद जान जाओ ....आज़ादी कितनी महंगी है आती ...
कितनी बहनें सूखी राखी मनाती ....
दीवारों के सहारे टिकी माँ महिनो का हिसाब भूल जाती ..
यारों की गलियाँ अरसों दीवाली-ईद कहाँ मानती ...
कभी मेरी तस्वीर से नज़रे मिलाना शायद जान जाओ ....आज़ादी कितनी महंगी है आती ...
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